Politics

ममता के राज में नहीं थम रहा हिंसा का दौर, वर्धमान में बीजेपी-टीएमसी कार्यकर्ताओं में खूनी झड़प

Written By Neeraj Chouhan | Mumbai | Published:

भद्रलोक के नाम से मशहूर बंगाल झुलस रहा है। तपती गर्मी से नहीं बल्कि चुनावी हिंसा की आंच से। आम चुनाव खत्म हो चुके हैं, प्रचंड बहुमत के साथ नई सरकार का भी गठन हो चुका है। अच्छे भविष्य की उम्मीद के साथ देश भी एक नई दिशा में आगे बढ़ चुका है। लेकिन कुछ नहीं बदला तो वो बंगाल है। आज भी ममता बनर्जी का बंगाल चुनावी हिंसा के मुहाने पर ही खड़ा है। 

लोकसभा चुनाव के सातों चरण चुनावी हिंसा के भेंट तो चढ़े ही। BJP की प्रचंड जीत और TMC को हुए नुकसान के बाद तो जैसे बंगाल हिंसा के गढ़ में तब्दील हो गया है। राजनीतिक हत्याएं यहां सत्ता में बैठे लोगों के लिए जायज हो गए हैं। TMC को BJP के सामने अपनी सियासी जमीन खोने का डर सता रहा है। यही वजह है कि उसके कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर पूरे राज्य को हिंसा में झोंक दिया है।

चुनाव में भी दीदी को इस राजनीतिक तरीके से कामयाबी हासिल नहीं हुई। जिसकी वजह से उनको मोदी के सामने करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। यही वजह है कि बंगाल अब भी राजनीतिक हिंसा से जूझ रहा है। बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में एक बम धमाका हुआ, जिसमें 2 लोगों की मौत हो गई। जबकि 4 लोग घायल हो गए। 

जिसने सूबे के माहौल को और बिगाड़ दिया। हालांकि ममता को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। एक तरफ बंगाल राजनीतिक हिंसा से जूझ रहा है, तो राज्य की मुखिया ममता अब 'स्टेच्यू पॉलिटिक्स' पर उतर आईं हैं। ताकि जनता की भावनाओं के साथ खेला जा सके। ममता ने ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ति के साथ पैदल मार्च निकाला। इससे पहले ममता ने बीजेपी पर बंगाल की संस्कृति खत्म करने का भी आरोप जड़ दिया। 

इस सियासी बयानबाजी के बीच बर्धमान में भी BJP-TMC के कार्यकर्ताओं में हिंसक झड़प हुई। जिसमें टीएमसी के एक कार्यकर्ता की मौत हो गई। जबकि तीन कार्यकर्ताओं के घायल होने की खबर आई। इस हिंसा का ठीकरा भी TMC ने बीजेपी पर ही फोड़ा। जिस पर बीजेपी ने पलटवार किया।

कुल मिलाकर पूरे बंगाल में हिंसा ने अपना डेरा जमा लिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि बंगाल में कब तक सियासी बवाल जारी रहेगा? कब तक बंगाल राजनीतिक हिंसा में झुलसता रहेगा।

DO NOT MISS