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शाहीन बाग पर बड़ा खुलासा: धरने के पीछे कांग्रेस की "साजिश", CAA के नाम पर लोगों को "भड़काया"

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

पिछले 35 दिनों से दिल्ली के शाहीन बाग में CAA के विरोध में चल रहे प्रदर्शन ने पूरे देशा का ध्यान अपनी ओर खींचा, लेकिन समय के साथ इस विरोध प्रदर्शन पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे और पूछा जाने लगा  साथ इस विरोध प्रदर्शन पर    आखिर कौन है वो जिसने दिल्ली को "दंगे के हालात" पर पहुंचा दिया है? आखिर शाहीन बाग का काला सच क्या है? शाहीन बाग को कौन सुलगा रहा है?  इस सच्चाई से परदा उठने वाला है.. 

सबसे पहले हम आपको मिलाते हैं उस चेहरे से जिसने शाहीन बाग कोजलाने की साजिश की। आखिर वो कौन से नेता थे जो इस  हंगामे के पीछे हैं? ये सारी परतें आज खुलेंगी लेकिन सबसे पहले मिलवाते हैं उस चेहरे से जिसने इस शाहीन बाग का प्लान बनाया। रिपब्लिक भारत के SIT टीम ने शाहीन बाग के ऑर्गनाइज़र सरजील इमाम से बात की। जिसमें उन्होंने कई चौंकाने वाले खुलासे किए।

सरजील “दंगे पर पीएचडी” करने से पहले आईआईटी पवई से पढ़ाई कर चुका है और वहां पढ़ा भी चुका है।  लेकिन लगता है कि दंगे पर पीएचडी करते करते उसने प्रैक्टिकल का भी मन बना लिया है और प्रैक्टिकल के लिए उसने जगह चुनी शाहीन बाग

रिपब्लिक भारत के SIT टीम ने शाहीन बाग के ऑर्गनाइज़र सरजील इमाम से बात की। जिसमें उन्होंने कई चौकाने वाले खुलासे किए।

सरजील इमाम, ऑर्गनाइज़र, शाहीन बाग- हमें दिल्ली जाम करना है, हिन्दुस्तानी मुसलमान शहरी हैं और हमें शहरों को जाम करना है।

‘दंगे’ पर अपनी पीएचडी के लिए सरजील ने प्रयोगशाला की तलाश 5 दिसंबर से तेज़ कर दी थी। सीएए को लेकर मोदी विरोध में जहर समूचे दिल्ली में कैसे फैलाया जाए इसकी तैयारी जोरशोर से होने लगी।

सरजील इमाम, ऑर्गनाइज़र, शाहीन बाग- गुरुवार 5 दिसबंर को हम मिले, फ्राइडे 6 के लिए फैसला किया गया कि हम लोग पर्चे बांटेंगे। रात भर पर्चा मैंने ही लिखा, सुबह छपा 10-15 हजार की तादाद में कम से कम 60-70 स्टूडेंट,  जेएनयू के लड़के -लड़कियां पूरी दिल्ली में बंट गए। एक टीम पुरानी दिल्ली गई, एक जाफराबाद, एक टीम ओखला, निजामुद्दीन मैं खुद गया। ये टीम अलग-अलग जगह गईं और पर्चे बांटे, ऐसे ये शुरु हो गया।

और फिर 15 दिंसबर को जगह तय हो गई। शाहीन बाग,, “दंगे के विद्यार्थी” सरजील को पता था कि अपने छोटे से प्रदर्शन की तरफ दुनिया का ध्यान कैसे खींचा जाता है। इंटरनेशनल मीडिया के लिए तमाशा कैसे बनाया जाता है।

सरजील इमाम, ऑर्गनाइजर, शाहीन बाग- हम लोगों का एक आइडिया था कि हम लोग रोड जाम करेंगे तो बेहतर होगा।

रिपोर्टर- रोड जाम?

सरजील इमाम, ऑर्गनाइजर, शाहीन बाग- रोड जाम करें। एक दिन के लिए रोड जाम करे ।

रिपोर्टर- तो उसका फायदा होगा।

सरजील इमाम, ऑर्गनाइजर, शाहीन बाग- हां उसका फायदा ये होगा कि इंटरनेशल मीडिया अटेंशन फौरन मिलता है।

सरजील इमाम, ऑर्गनाइजर, शाहीन बाग- दिल्ली में अगर एक दिन सड़क जाम हो गई तो उसका इंटरनेशनल मीडिया अटेंशन बहुत मिलता है, उस तरह का आइडिया था।

यानी गेम तैयार था, बिसात पर खिलाड़ी बिछने लगे। बलवाई भीड़ को उसका नेता मिल गया था। सरजील और उसके साथी स्टेज मैनेजमेंट में लग गए, वहां से लोगो को भड़काने के लिए भाषणबाजी शुरु हो गई। तभी इनके पास जामिया में हिंसक प्रदर्शन की खबर आई। इनके साथ जो लोग थे वो भी उग्र होने लगे। जामिया-बाटला हाउस की गलियों से भीड़ शाहीन बाग में इक्कठा होने लगी। हिंसा की पटकथा लिखी जा चुकी था, बस पहले पत्थऱ फेंकने का इंतजार था।


सरजील इमाम, ऑर्गनाइजर, शाहीन बाग- एक आदमी आया दाढ़ी वाला, पगड़ी पहने हुए था, उसके बाद से फिर वो कभी दिखा नहीं। उसने हाथ में एक बड़ा लम्बा तिरंगा लिया हुआ था।  वो बोला कि मारो पत्थर। 4-5 लोगों ने पत्थर मारना शुरु किया फिर 20-25 लोग पत्थर मारने लगे। 2-4 गाड़ियों के शीशे टूटे होंगे, 10 मिनट के अंदर हजारों लोग नीचे उतर गए 20-25 लोग बचे हुए थे मैं भी था। मैं लोगों को खींच रहा था मत मारो पत्थर। सामने पुलिस वाले थे, जामिया में भी Violence हुआ था।

रिपोर्टर- कौन थे वो लोग।

सरजील इमाम, ऑर्गनाइजर, शाहीन बाग- नए लोग भी थे, लोकल थे जिन्होंने दोस्त बना लिए थे। 

रिपोर्टर- लीड करने वाले थे

सरजील इमाम, ऑर्गनाइजर, शाहीन बाग- हां थे, वो आए थे ना, फिर वो कभी नहीं आए।

पुलिस के जाने के बाद कुछ लोग फिर शाहीन बाग में जुटे। बैरिकैड लगे, और रोड ब्लॉक करके शाहीन बाग में प्रदर्शन फिर शुरु हो गया।

सरजील इमाम, ऑर्गनाइजर, शाहीन बाग- भीड़ चली गई तो कुछ मेहनत भी नहीं करनी थी। बैरिकेड लगाना था, रात को ट्रैफिक भी नही था।

रिपोर्टर- बैरिकेड आप लोगों ने लगाया।

सरजील इमाम, ऑर्गनाइजर, शाहीन बाग-हम लोगों ने नहीं लड़कों ने लगाया। पुलिस की ही बैरिकेड थे अरेंज कर दिया

रिपोर्टर- रोड पूरा ब्लॉक कर दिया।

सरजील इमाम, ऑर्गनाइजर, शाहीन बाग- रोड ब्लॉक्ड है, जब हम लोग पहुंचे तो 100-200 लोग बैठे थे और उनका कहना था आप लोग बोलो। हमने बोलना शुरु किया।

इसके बाद धीर-धीरे शाहीन बाग में पूरी किलाबंदी होने लगी,  खाने-पीने का इंतजाम होने लगा भीड़ जुटनी शुरु हो गई। जो प्रदर्शन एक दिन के लिए होना था वो अंतहीन सिलसिला बना गया। प्रधानमंत्री मोदी को गाली देना रोज का रिवाज हो गया। मास्टरमाइंड सरजील का दंगे पर प्रैक्टिकल सही तरीके से आगे बढता जा रहा था।

 

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