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'सेलेक्टिव आउटरेज' को आड़े हाथों लेते हुए पत्रकार आशुतोष ने कहा - ये सांप्रदायिक लोगों का हैं काम

Written By Amit Bajpayee | Mumbai | Published:

बीते कुछ सालों में सोशल मीडिया की भूमिका हर मुद्दे पर काफी बढ़ गई है. चाहे वह रेवाड़ी दुष्कर्म,  अर्बन नक्सल , पद्मावती , सीबीएसई हो या फिर विजय माल्या का मामला हो . हर किसी मुद्दे पर चयनात्मक आक्रोश ( सेलेक्टिव आउटरेज ) सोशल मीडिया की एक खास बात है.  रिपब्लिक भारत से बातचीत करते हुए आशुतोष ने सोशल मीडिया में चयनात्मक आक्रोश 'सेलेक्टिव आउटरेज' परअपनी राय रखी. 

आशुतोष ने कहा सेलेक्टिव आउरेज की जो लोग बात करते हैं. वह कहीं न कहीं कुंठा से ग्रस्त लोग है. इस देश में हर इंसान इस बात को लेकर सेंसिटिव है, चाहे वह किसी भी धर्म या जाती का हो. और देश में कहीं किसी के साथ कोई तकलीफ होती है तो उसके साथ वह खड़ा होता है. यहीं हमारा हिंदू धर्म है. वासुदेव कुटुम्बकम की हम बात करते हैं. 


उन्होंने आगे कहा, चयनात्मक आक्रोश दिखाना संप्रदायिक लोगों का काम है. लोगों इस बहाने धर्म के आधार पर बांट दो ताकि इससे पार्टियां राजनीतिक रोटियां सेकती रहे. जब आप सोशल मीडिया पर किसी एक जाती को लेकर प्रतिक्रिया देते हैं. तो आप लोगों को धर्म के नाम पर बांटते हैं. मुझे तो ऐसा कभी नहीं लगा कि लोग हिंदू या मुसलमान के नाम पर वोट करते है. लोग इंसान के नाम पर वोट करते हैं. यह एक संप्रदायिकता को बढ़ाने का एक पैमाना है. 

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मुझे तो यूजर्स पहले दिन से ही  ट्रोल्स का शिकार बनाते आए हैं. एक समय ऐसा आया कि इनसे परेशान होकर मैंने ट्विटर छोड़ दिया था. वह इसलिए छोड़ दिया क्योंकि लोगों ने मेरे खिलाफ जमकर अभ्रद्र भाषा का प्रयोग किया. इन सब के बाद मुझे लगा मैं उनके ट्रेप में फंस रहा हूं. पिछले चार पांच सालों से मैं सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लिखता हूं. यूजर्स उस पर क्या कमेंट करते हैं लेकिन मैं उसे देखता भी नहीं हूं. उन्होंने जितनी अभ्रद्र भाषा का प्रयोग करना है वह करें. यह लोग एक खास तरीके के गिरोह चलाते हैं. जो कुछ लोगों को टारगेट करता हैं. 

सवाल -सेलेक्टिव आउटरेज के दौर में किस हद तक यह लोगों की सोच को उनके वोट करने के पैटर्न में बदल रहा है. 

इस पर जवाब देते हुए आशुतोष ने कहा मुझे नहीं लगता ये लोगों की सोच को बदल पाएंगे. यह एक राजनीतिक हथियार हैं. जो अपने विरोधियों को कमजोर करने के लिए और उनको साइक्लोजिकल डाउन करने के लिए प्रयोग किया जाता है लेकिन जो समझदार लोग हैं वह अब इन सब बातों को समझ चुके हैं. तो इससे कुछ ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता हैं. 

सवाल - अब आगे क्या फिर से पत्रकार आशुतोष को देख सकते हैं?

आशुतोष ने इस सवाल पर मुस्कराते हुए कहा, 'मैं पत्रकार था राजनीति में चला गया था. अब मैं दोबारा पत्रकारिता में लौट आया हूं. 

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सवाल - 2019 में केंद्र में किसकी सरकार बनते देख रहें हैं ?

यह कहना मुश्किल है लेकिन एक बात निश्चित है कि नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में बीते सालों में कमी आई है. इसका असर पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के लोकसभा के तीन उप चुनाव में दिखाई पड़े. 

वही आम आदमी पार्टी छोड़ने पर रहस्य बरकरार रखते हुए आशुतोष ने कहा सही वक्त आने पर सबको जवाब दूंगा.

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