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अरुण जेटली बोले- 'नेहरू ने बेटी को राजनीतिक वारिस बनाया', शशि थरुर ने यूं किया पलटवार...

Written By Neeraj Chouhan | Mumbai | Published:

भारतीय राजनीति में वंशवाद की जड़े काफी पुरानी है, समय- समय पर इस पर बहस भी होती रहती है. भारतीय जनता पार्टी अक्सर गांधी परिवार पर वंशवादी राजनीति करने का आरोप लगाती है. इसी कड़ी में केंद्रीय वित्त मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरूण जेटली ने गांधी परिवार पर तंज कसते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहलाल नेहरु पर वंशवादी लोकतंत्र की आधारशिला रखने का अरोप लगाया. 

अरुण जेटली ने गुरूवार को अपने अधिकारिक ट्वीटर हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा कि जब पंडितजी ने अपनी बेटी को उत्तराधिकारी के रूप में प्रोत्साहित किया. तब उन्होंने वंशवादी लोकतंत्र की आधारशिला रखी. जब उनकी बेटी ने 1975 में तानाशाही अपनाई. तो वह उनकी पार्टी की विचारधारा बन गई कि  भारत को अनुशासित लोकतंत्र के रूप में बदलना है."

अरुण जेटली के इस वार पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बिना किसी देर किए हुए करारा प्रहार किया..

उन्होंने अरुण जेटली के ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए लिखा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि नेहरु ने अपनी बेटी को  अपनी बेटी को उत्‍तराधिकारी के रूप में आगे बढ़ाया. बल्कि उन्होने यह घोषण की थी कि , 'मैं कब्र से शासन नहीं कर सकता'. इसलिए उनके निधन के बाद लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने और इंदिरा गांधी के नाम का उस वक्त जिक्र भी नहीं हुआ था. राजनीतिक इतिहास स्पष्ट रुप से बीजेपी को सूट नहीं करती..'

ब्लॉक से साधा था कांग्रेस पर निशाना

इससे पहले भी अरुण जेटली ने कांग्रेस पर वंशवादी राजनीति का आरोप लगाते हुए एक ब्लॉक लिखा था. सरदार पटेल के पिता का नाम क्या था शीर्षक से फेसबुक पोस्ट में जेटली ने कहा कि कांग्रेस जैसी वंशवादी पार्टी में प्रतिभा और मेधा का कोई स्थान नहीं होता है. परिवार के इर्द गिर्द की भीड़ कैडर होती है.  जेटली की यह पोस्ट ऐसे समय में आयी है जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के परिवार के बारे में कांग्रेस के कुछ नेताओं के कथित बयानों को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है.

कांग्रेस ने भी किया था पटलवार 

विपक्षी पार्टी ने मंगलवार को उन पर पलटवार करते हुए सवाल किया कि जेटली ‘रिजर्व बैंक की स्वायत्तता पर हमले’ और अपने मंत्रालय से जुड़े अन्य विषयों पर कोई पोस्ट या ब्लॉग क्यों नहीं लिखते. पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘वित्त मंत्री इस बात पर ब्लॉग क्यों नहीं लिखते कि रुपए की कीमत इतनी क्यों गिर रही है? वित्त मंत्री इस पर भी ब्लॉग क्यों नहीं लिखते कि आरबीआई की स्वायत्तता पर क्यों हमला किया जा रहा है? वित्त मंत्री इस बात पर ब्लॉग क्यों नहीं लिखते कि जब कच्चे तेल की कीमत नीचे आ रही है, फिर भी पेट्रोल और डीजल की कीमत आसमान छू रही है?’’ उन्होंने पूछा, ‘‘वित्त मंत्री इस बात पर ब्लॉग क्यों नहीं लिखते कि देश में पिछले 53 महीनों से, जो निवेश है वो कम क्यों हो गया है? वित्त मंत्री इस बात पर ब्लॉग क्यों नहीं लिखते कि करंट अकाउंट डेफिसिट क्यों बढ़ता जा रहा है?’’

 

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