Politics

क्या महाराष्ट्र में भी कर्नाटक की तरह जोड़-तोड़ की तैयारी चल रही है? जानें इस मुद्दे पर क्या है अर्नब की राय

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे आए 14 दिन हो चुके हैं। लेकिन अभी तक राज्य के मतदाताओं को नई सरकार का दीदार नहीं हो पाया है। ये हालात तब हैं जब पश्चिमी भारत के इस राज्य में बीजेपी और शिवसेना गठबंधन को सरकार बनाने के लिए साफ-साफ जनादेश मिला हुआ है। क्योंकि बीजेपी के खाते में 105 सीटें हैं, जबकि उसकी सहयोगी शिवसेना के पास 56 विधायक हैं। NDA की दोनों सहयोगियों की सीटों को मिला दें तो आंकड़ा 161 तक पहुंच जाता है। जो बहुमत के आंकड़े यानी 145 से 16 सीटें ज्यादा है। 

यानी साफ है कि महाराष्ट्र में त्रिशंकु विधानसभा जैसी कोई स्थिति नहीं है। लेकिन फिर भी महाराष्ट्र के मतदाता नई सरकार बनने की राह ही ताकें जा रहे हैं। और ये इंतजार इसलिए है क्योंकि महाराष्ट्र में कुछ सालों से छोटे भाई की भूमिका निभा रही शिवसेना अचानक बड़ा भाई बनने पर अड़ गई है। जो सीटों की लिहाज से बड़े भाई की हैसियत का लुफ्त उठा रही बीजेपी को बिलकुल मंजूर नहीं है। 

चुनाव के पहले और नतीजों के बाद शिवसेना कई बार ये दावा कर चुकी है कि समझौता बराबरी पर यानी 50-50 फॉर्मूला पर हुआ था। यहां 50-50 फॉर्मूला का मतलब ये है कि ढाई-ढाई साल के बारी-बारी से दोनों दलों से मुख्यमंत्री होगा।

हालांकि बीजेपी ने इस दावे का कभी समर्थन नहीं किया। समर्थन तो दूर बीजेपी ने शिवसेना के इस दावे को खारिज भी कर दिया, कि उसके और शिवसेना के बीच ऐसा कोई सियासी समझौता कभी हुआ ही नहीं। बीजेपी की तरफ से हर तरह की कोशिश के बावजूद शिवसेना मुख्यमंत्री पद छोड़ने को तैयार नहीं है, चाहे राज्य में राष्ट्रपति शासन क्यों न लग जाए।

 जी हां राष्ट्रपति शासन, ये कोई सियासी जुमला नहीं, बल्कि हकीकत है। क्योंकि महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 9 नवंबर को खत्म हो रहा है। और इससे पहले हर हाल में सरकार का गठन जरूरी है। अगर 9 नवंबर यानी शनिवार तक कोई दल या गठबंधन सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करता है। तो वहां राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। 

चुनाव में 105 सीटों वाली बीजेपी सबसे बड़ा दल है और उसकी गठबंधन सहयोगी शिवेसना के पास 56 विधायक हैं। लेकिन 50-50 फॉर्मूले को लेकर बीजेपी और शिवसेना के बीच बात अटकी है। क्योंकि शिवसेना सरकार में बराबरी का प्रतिनिधित्व चाहती है। और बीजेपी इसके लिए तैयार नहीं हो पा रही। जबकि 24 अक्टूबर को चुनावी नतीजे के आने के बाद से शिवसेना मुख्यमंत्री पद को लेकर अड़ी हुई है।

अर्नब की राय

2 दिन बाद महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल ख़त्म हो रहा है, लेकिन सरकार बनने की अभी तक कोई उम्मीद नहीं है। बीजेपी और शिवसेना दोनों आपस में बात नहीं कर रहे हैं, सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। दोनों पार्टियों के नेता महाराष्ट्र के राज्यपाल से मिले। लेकिन सरकार बनाने का दावा नहीं किया, विधायकों को होटल में छिपाया जा रहा है। मतलब साफ है ये प्रेशर पॉलिटिक्स हो रही है। मैं इसको दबाव की राजनीति नहीं, ब्लैकमेलिंग कहता हूं। जनता के साथ ब्लैकमेलिंग, जनता के वोट की ब्लैकमेलिंग,  जनता के विश्वास की ब्लैकमेलिंग,  सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं, पूरा देश ये तमाशा देख रहा है।

शिवसेना को विधायकों के टूटने का डर?

हालांकि सूत्रों के मुताबिक बीजेपी के इस प्रस्ताव को अगर उसकी सहयोगी शिवसेना ठुकरा देती है तो महाराष्ट्र तक ही सीमित इस पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। एक दिन पहले ही इसका इशारा महाराष्ट्र से राज्यसभा सदस्य और बीजेपी नेता संजय काकडे कर चुके हैं। संजय काकडे एक दिन पहले ही ये दावा कर चुके हैं कि शिवसेना के 45 नवनिर्वाचित विधायक किसी भी वक्त बीजेपी के पाले में आ सकते हैं। और महाराष्ट्र में सरकार बनाने में उसकी मदद कर सकते हैं। जैसे-जैसे बीजेपी और शिवसेना के बीच कड़वाहट बढ़ेगी, वैसे-वैसे शिवसेना के टूटने का खतरा बढ़ जाएगा। क्योंकि उसके कई विधायक विपक्ष में बैठने का जोखिम उठाना पसंद नहीं करेंगे। 

हाराष्ट्र में सरकार बनाने की डेडलाइन खत्म होने के कुछ घंटों पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एक तरफ शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे ने मीटिंग के बाद विधायकों को होटल में शिफ्ट कर दिया है तो बीजेपी के नेता भी गवर्नर से मिले हैं। सूबे में सरकार गठन को लेकर अगले कुछ घंटे अहम हो सकते हैं। इस बीच ठाकरे परिवार के निवास स्थान 'मातोश्री' में शिवसेना विधायकों की उद्धव ठाकरे के साथ अहम बैठक हुई। मीटिंग के बाद शिवसेना विधायकों को रंग शारदा होटल शिफ्ट गया है। पार्टी का कहना है कि उसके विधायकों की खरीद-फरोख्त की जा सकती है। पार्टी यह आशंका अपने मुखपत्र सामना में भी जता चुकी है।
 

DO NOT MISS