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अकाली दल का तीखा हमला, 'कमलनाथ को चुनकर कांग्रेस ने 1984 के दंगों के जख्मों पर मला नमक'

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

तीन राज्यों में कांग्रेस की जीत का डंका बजने के बाद मध्यप्रदेश और राजस्थान में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर सस्पेंस खत्म हो चुका है. लेकिन मध्यप्रदेश की कमान के लिए कमलनाथ के नाम का ऐलान करना कांग्रेस के लिए परेशानी की वजह बनने की राह पर है. दरअसल कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाने को लेकर कांग्रेस के खिलाफ शिरोमणि अकाली दल ने मोर्चा खोल दिया है.

पंजाब विधानसभा में विपक्षी दल शिरोमणि अकाली दल ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कमलनाथ को चुनने के कांग्रेस पार्टी के फैसले का विरोध करते हुए शुक्रवार को कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व वाली इस पार्टी ने 1984 के दंगों के पीड़ितों के जख्मों पर नमक मलने जैसा काम किया है.

अकाली दल के विधायक बिक्रम सिंह मजीठिया ने इस मुद्दे को सदन में उठाया हालांकि उनसे पहले उनकी ही पार्टी के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिल्ली में आरोप लगाते हुए कहा था कि 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राष्ट्रीय राजधानी में भड़के दंगों में कमलनाथ का हाथ था.

मजीठिया ने कहा कि कांग्रेस ने कमलनाथ को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री चुनकर दंगा पीड़ितों के जख्मों पर नमक मलने का काम किया है.

वहीं संसदीय कार्यमंत्री ब्रह्म मोहिंदर ने दावा किया कि कमलनाथ का 1984 के दंगों में कोई हाथ नहीं है. उन्होंने अपने मोबाइल फोन में एक फोटो भी दिखाया जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल एक समारोह में कमलनाथ का सम्मान करते दिख रहे है. मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आरोप लगाया कि विपक्ष 1984 के दंगों का राजनीतिकरण कर रहा है.

विधानसभा के शीत सत्र के अंतिम दिन ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर हस्तक्षेप करते हुए कैप्टन सिंह ने कहा कि जहां तक नाथ के खिलाफ लगे आरोपों का सवाल है उसमें कानून अपना काम करेगा. उन्होंने कहा कि नाथ पर आरोप लगने के बाद उन्होंने दस साल केंद्र में मंत्री के रूप में भी काम किया है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि नानावटी आयोग की रिपोर्ट में महज नाम आने से ये तय नहीं होता कि कमलनाथ इन मामलों में शामिल थे.

सुखबीर सिंह बादल के इस आरोप पर कि 1984 के दंगों के मामलों को बीते सालों में ‘‘दबा’’ दिया गया, मोहिंदर ने कहा, ‘‘देश ने पांच गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री देखे हैं और वे शिरोमणि अकाली दल के सहयोगी रहे हैं. अगर आपको ऐसा लगता था तो तब आपने आवाज क्यों नहीं उठाई.’’

(इनपुट : भाषा)

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