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CBI निदेशक का गोपनीय जवाब लीक और मनीष सिन्हा के आरोप प्रकाशित होने से SC नाराज

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई निदेशक आलोक कुमार वर्मा के खिलाफ सीवीसी की रिपोर्ट में प्रतिकूल टिप्पणियों पर वर्मा का जवाब मीडिया में लीक होने और जांच ब्यूरो के उपमहानिरीक्षक मनीष कुमार सिन्हा द्वारा एक अलग याचिका में लगाए गए आरोपों के प्रकाशन पर मंगलवार को कड़ी नाराजगी व्यक्त की है.

CJI रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता फली नरिमन के अनुरोध पर मामले की दोबारा सुनवाई की. इसमें साफ किया कि न्यायालय किसी भी पक्षकार को नहीं सुनेगा और स्वंय को उसके द्वारा उठाए गए मुद्दों तक सीमित रखेगा. इस मामले में नरिमन CBI निदेशक आलोक वर्मा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.

इस पीठ में प्रधान न्यायाधीश के साथ न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ शामिल हैं. वर्मा का गोपनीय जवाब लीक होने से बेहद नाराज पीठ ने कहा कि वो जांच एजेंसी की गरिमा बनाए रखने के लिए सीबीआई निदेशक के जवाब को गोपनीय रखना चाहती थी.

सुप्रीम कोर्ट में आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक के अधिकारों से वंचित करने और उन्हें अवकाश पर भेजने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई हो रही थी. पीठ ने इस मामले की सुनवाई 29 नवंबर के लिये स्थगित करते हुए कई शीर्ष प्राधिकारियों के खिलाफ सिन्हा द्वारा लगाये गए आरोपों वाली याचिका पर आधारित मीडिया की तमाम खबरों को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया है.

पीठ ने कहा, ‘‘कल, हमने उल्लेख करने की (नागपुर तबादले के खिलाफ सिन्हा की याचिका शीघ्र सुनवाई के लिये सूचीबद्ध करने) अनुमति देने से इंकार कर दिया था और हमने कहा था कि इसमें सर्वोच्च गोपनीयता बनाए रखने की जरूरत है.’’

CJI ने मीडिया में प्रकाशित सिन्हा के निराधार आरोपों का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘लेकिन यहां एक वादी है जिसने हमारे सामने इसका उल्लेख किया और फिर बाहर जाकर याचिका की प्रति सभी को वितरित की.’’  उन्होंने कहा, ‘‘इस संस्था के सम्मान को बनाए रखने के हमारे प्रयासों से ये लोग इत्तेफाक नहीं रखते.’’ 

सिन्हा ने सोमवार को जांच ब्यूरो के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ जांच में कथित हस्तक्षेप का प्रयास करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, केन्द्रीय मंत्री हरिभाई पार्थीभाई चौधरी और सीवीसी के वी चौधरी के नाम भी घसीट लिए थे.

पीठ ने जब दोबारा मामले की सुनवाई शुरू की तो नरिमन ने कहा कि शीर्ष अदालत ने 16 नवंबर को वर्मा से कहा था कि सीवीसी के निष्कर्षो पर जवाब देने का आदेश दिया था और न्यूज पोर्टल में प्रकाशित लेख 17 नवंबर का है.

नरिमन ने स्पष्ट किया कि इस लेख में प्रारंभिक जांच की कार्यवाही के दौरान सीवीसी को दिया गया वर्मा का जवाब शामिल है.

हालांकि, पीठ ने इसके बाद सरकार के शीर्ष प्राधिकारियों के खिलाफ सिन्हा की याचिका में लगाए गए आरोपों के आधार पर प्रकाशित कुछ अन्य लेखों का जिक्र किया.

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ये कल का लेख है. हम जानना चाहते हैं कि क्या चल रहा है. न्यायालय लोगों के लिए अपनी मनमर्जी की अभिव्यक्ति का मंच नहीं है. ये ऐसा स्थान है जहां लोग अपने न्यायिक अधिकारों के बारे में निर्णय के लिए आते हैं. ये कोई मंच नहीं है और हम इसे दुरूस्त करेंगे.’’ 

SC ने सुनवाई दोबारा 29 नवंबर के लिए स्थगित कर दी और CBI सहित किसी भी पक्षकार को सुनने से इंकार कर दिया. केन्द्रीय सतर्कता आयोग की गोपनीय रिपोर्ट पर आलोक वर्मा का जवाब मीडिया में लीक होने पर बेहद नाराज प्रधान न्यायाधीश गोगोई ने कहा ‘‘आपमें से कोई भी सुनवाई का पात्र नहीं है.’’ 

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने पहली बार सुनवाई स्थगित करते हुए कहा था, ‘‘हमें नहीं लगता कि आपमें से कोई भी सुनवाई की पात्रता रखता है’’

वर्मा का गोपनीय जवाब मीडिया में लीक होने की घटना पर पीठ ने न्यूज पोर्टल के नाम का जिक्र किए बगैर ही मीडिया रिपोर्ट की एक प्रति नरिमन को सौंप दी. इस पोर्टल ने सीबीआई के निदेशक के जवाब पर कथित रूप से एक खबर चलाई थी.

पीठ ने अपनी नाराजगी छिपाए बगैर ही कहा, ‘‘नरिमन सिर्फ आपके लिए और आलोक वर्मा के अधिवक्ता के रूप में नहीं, हमने आपको यह अवसर दिया है क्योंकि आप इस संस्था के सर्वाधिक और वरिष्ठ सदस्यों में से एक हैं. कृपया हमारी मदद कीजिये.’’ 

नरिमन ने मीडिया रिपोर्ट के अवलोकन के बाद कहा कि यह पूरी तरह से ‘अनधिकृत’ है और वह इससे ‘‘आहत और हतप्रभ’’ है.

प्रधान न्यायाधीश ने तब नरिमन से कहा कि शंकरनारायणन (वो भी आलोक वर्मा के वकील हैं) ने सोमवार को न्यायालय के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया था तथा सीबीआई निदेशक की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए और समय देने का अनुरोध किया था.

नरिमन ने पीठ से कहा, ‘‘किसी ने भी उनसे (नारायणन) से ऐसा करने के लिए नहीं कहा था. यह पूरी तरह अनधिकृत था. मुझे कभी सूचित नहीं किया गया. किसी ने भी उनसे इस मामले का उल्लेख करने के लिए नहीं कहा था. मैं इससे बहुत आहत हूं.’’ 

नरिमन ने कहा कि उन्होंने और उनके जूनियर ने वर्मा का जवाब तैयार करने के लिए देर रात तक काम किया था. मीडिया की खबर का जिक्र करते हुए नरिमन ने कहा कि न्यूज पोर्टल और उसके संबंधित पत्रकारों को न्यायालय को तलब करना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘‘ये कैसे आ सकता है? ये तो लीक है। ये जिस तरह से किया गया है उससे मैं भी आहत हूं.’’ 

इसके बाद प्रधान न्यायायाधीश ने सुनवाई 29 नवंबर के लिये स्थगित करते हुए कहा कि पीठ इसके लिए कोई कारण नहीं लिखना चाहती. सुनवाई के अंतिम क्षणों में पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘हमें नहीं लगता कि आपमें से कोई भी किसी प्रकार की सुनवाई की पात्रता रखता है.’’ 
(इनपुट : भाषा)

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