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J&K विधानसभा भंग करने को लेकर राज्यपाल मलिक ने गिनाए ये 4 कारण, विशेषज्ञों में बंटी राय..

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

जम्मू कश्मीर विधानसभा को भंग करने के राज्यपाल के फैसले के तर्क को लेकर संविधान के जानकारों और विधि विशेषज्ञों में मतभेद हैं . एक पक्ष इसे संविधान सम्मत तो दूसरा पक्ष इसे उनके अधिकार क्षेत्र में निहित मानता है . 

राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने बुधवार रात विधानसभा भंग करने के कदम के पीछे चार तर्क दिये . इनमें ‘‘बड़े स्तर पर खरीद फरोख्त और धन का संभावित लेनदेन’’ और ‘‘विपरीत राजनीतिक विचारधाराओं’’ वाली राजनीतिक पार्टियों द्वारा स्थिर सरकार के गठन की संभावना नहीं होना शामिल है .

पीटीआई्-भाषा ने इन विशेषज्ञों से राज्यपाल के निर्णय पर उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाही थी . 

लोकसभा के पूर्व महासचिव और संविधान विशेषज्ञ पीडीटी आचार्य ने कहा कि ऐसा प्रथम बार हुआ है कि विधानसभा को भंग करने हेतु राज्यपाल इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि ‘‘विपरीत राजनीतिक विचारधारा’’ वाली पार्टियों द्वारा एक स्थिर सरकार बनना असंभव है . आचार्य ने कहा कि राज्यपाल का यह निष्कर्ष कि विपरीत राजनीतिक विचारधाराएं स्थिर सरकार नहीं दे सकते, विश्वसनीय नहीं है . 

वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने आचार्य से सहमति व्यक्त करते हुये कहा कि विपरीत राजनीतिक विचारधाराओं के आधार के चलते विधानसभा भंग करना अनुचित है .

किंतु लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष सी काश्यप आचार्य से सहमत नहीं दिखे . उन्होंने कहा कि राज्यपाल का निर्णय तनिक भी ‘‘असंवैधानिक’’ नहीं है .

वरिष्ठ वकील और संविधान विशेषज्ञ राकेश द्विवेदी ने काश्यप से सहमति व्यक्त करते हुये कहा, ‘‘ कोई भी दल इस स्थिति में नहीं है कि वह सरकार का गठन कर सके अथवा स्थाई सरकार दे सके .’’ 

वरिष्ठ अधिवक्ता अजित सिन्हा ने कहा कि राज्यपाल को उन आधारों को न्याय संगत ठहराना होगा जिसमें कहा गया है कि विपरीत विचारधाराओं वाले दल सरकार बना नहीं सकते . लेकिन यह वैध संवैधानिक तर्क इसलिए है क्योंकि इसमें संवैधानिक प्रणाली और विधि के शासन के पंगु होने की बात है .

उन्होंने कहा, ‘‘राज्यपाल ने अपनी शक्तियों का प्रयोग मर्यादा में किया है .’’ 

उल्लेखनयी है कि बुधवार को पीडीपी ने कांग्रेस एवं नेशनल कांफ्रेंस के समर्थन से कल राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया था . किंतु उसके चंद घटे बाद ही राज्यपाल ने विधानसभा भंग करने का निर्णय किया .

(इनपुट- भाषा)
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