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CBI के विशेष निर्देशक राकेश अस्थाना को भी झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में मचे अंदरूनी कलह ने अब एक नया मोड़ ले लिया है. गुरुवार को आलोक वर्मा को सेलेक्ट कमेटी ने पद से हटा दिया तो वहीं CBI के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को भी दिल्ली हाईकोर्ट की तरफ से झटके का सामना करना पड़ा है. दिल्ली हाईकोर्ट ने अस्थाना की याचिका को खारिज कर दिया है.

अस्थाना ने भी कथित भ्रष्टाचार के मामले में CBI द्वारा दर्ज प्राथमिकी को रद्द करवाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रूख किया थी. इस संबंध में हाईकोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुना दिया है. जो राकेश अस्थाना के लिए काफी बुरी ख़बर है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने राकेश अस्थाना और देवेंद्र कुमार पर FIR के खिलाफ उठाए गए सवालों को निरस्त कर दिया है. 

अदालत ने अपने आदेश में CBI को 10 हफ्ते के भीतर राकेश अस्थाना और देवेंद्र कुमार के खिलाफ जांच पूरा करने का आदेश भी दिया है. ये फैसला सीबीआई में मचे घमासान मामले पर एक और बड़ी चोट साबित होता दिखाई दे रहा है.

दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के बाद, राकेश अस्थाना ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष अपील करने की स्वतंत्रता मांगी, अस्थाना के इस अपील को स्वीकार कर लिया गया. हालांकि, दिल्ली उच्च न्यायालय ने अस्थाना को अंतरिम संरक्षण देने से इनकार कर दिया. लेकिन सीबीआई को 2 सप्ताह के लिए यथास्थिति बनाए रखने के लिए कहा.

गौरतलब है कि गुरुवार को ही CBI निदेशक आलोक वर्मा को उनके पद से हटाने का फैसला लिया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार समिति की बैठक में आलोक वर्मा के खिलाफ फैसला आया था.

गुरुवार शाम जारी एक सरकारी आदेश में बताया गया कि वर्मा को केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत दमकल सेवा, नागरिक रक्षा और होमगार्ड महानिदेशक के पद पर तैनात किया गया है. सीबीआई का प्रभार अतिरिक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को दिया गया है.

गौरतलब है कि CBI चीफ वर्मा औैर विशेष निदेशक राकेश अस्थाना ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगााए थे जिसके बाद उन्हें जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया था. 

वर्मा ने CBI डायरेक्टर पद से उन्हें हटाए जाने के फैसले को SC में चुनौती दी थी. वहीं अस्थाना ने भी भ्रष्टाचार के मामले में CBI द्वारा दर्ज प्राथमिकी को रद्द करवाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. जहां से उनको मायूसी हाथ लगी है.

क्या था मामला?

एजेंसी ने एक अभूतपूर्व कदम के तहत अपने विशेष निदेशक अस्थाना के खिलाफ रिश्वत का मामला दर्ज किया है.

आरोप है कि अस्थाना ने पांच करोड़ रूपए की रिश्वत के बदले कारोबारी सतीश सना को राहत प्रदान की थी. रिश्वत की राशि बिचौलिए मनोज प्रसाद ने प्राप्त की थी.

अस्थाना और सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा का एक दूसरे से विवाद चल रहा है और दोनों ने एक दूसरे के खिलाफ आरोप लगाए थे. प्रसाद को 16 अक्टूबर 2018 को भारत आने पर गिरफ्तार किया गया था.

ये मामला सीबीआई के एक अधिकारी को सौंपा गया है जिनके खिलाफ अस्थाना ने आरोप लगाए हैं. कुमार मांस निर्यातक मोइन कुरैशी से जुड़े मामले में जांच अधिकारी थे. उन्हें सतीश सना का बयान दर्ज करने में फर्जीवाड़े के आरोप में गिरफ्तार किया गया. अधिकारियों के अनुसार सना ने मामले में राहत पाने के लिए कथित तौर पर रिश्वत दी थी.

उन्होंने दावा किया, ऐसा आरोप है कि सना का बयान कथित तौर पर 26 सितंबर 2018 को अस्थाना के नेतृत्व वाली जांच टीम द्वारा दर्ज किया गया. लेकिन सीबीआई जांच में ये बात सामने आयी कि वह उस दिन हैदराबाद में था.

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फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए 10 हफ्ते का वक्त दिया है. इन 10 हफ्तों के भीतर अस्थाना के खिलाफ दर्ज हुई प्राथमिकी के मुताबिक उनके आरोपों की जांच करनी है.

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