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गांधी परिवार की सुरक्षा के नाम पर सियासी ड्रामा क्यों कर रही कांग्रेस पार्टी? जानें इस मुद्दे पर क्या है अर्नब की राय

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनके बेटे राहुल और बेटी प्रियंका से 28 साल बाद एसपीजी सुरक्षा वापस ली जाएगी और इसके बजाय उन्हें सीआरपीएफ की ‘जेड प्लस’ सुरक्षा दी जाएगी। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के परिवार को दी गयी एसपीजी सुरक्षा वापस लेने का फैसला एक विस्तृत सुरक्षा आकलन के बाद लिया गया। लिट्टे के आतंकवादियों ने 21 मई 1991 को राजीव गांधी की हत्या कर दी थी।

इस फैसले के साथ करीब 3,000 बल वाला एसजीपी अब केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में तैनात रहेगा। गृहमंत्रालय के इस फैसले पर कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि बीजेपी सरकार बौखलाहट में फैसले ले रही है। केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने इसे ओछी राजनीति बताया।

अर्नब की राय

आज केंद्र सरकार ने गांधी-वाड्रा परिवार के तीन सदस्य। सोनिया गांधी। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की SPG सुरक्षा हटा दी है।इस फैसले के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता देश भर में प्रदर्शन कर रहे हैं। गृहमंत्री अमित शाह के घर पर प्रदर्शन जारी है। कांग्रेस का आरोप है कि गांधी परिवार की सुरक्षा को ख़तरे में डाला जा रहा है। जो लोग ये आरोप लगा रहे हैं उन्हें मैं बता कि गांधी परिवार के सदस्य ज्यादातर यात्रा बिना SPG के ही करते हैं। सोनिया-राहुल और प्रियंका तीनों ने कई बार SPG सुरक्षा को तोड़ा है। बिना बुलेट प्रूफ गाड़ियों के यात्रा की है। इसका मतलब गांधी परिवार मानता है देश और विदेश दोनों जगहों पर उन्हें कोई ख़तरा नहीं है। उन्हें SPG की जरूरत ही नहीं। फिर गांधी-वाड्रा परिवार की सुरक्षा कम करना राजनीतिक बदला कैसे।

कैसे अस्तित्व में आया है एसपीजी​​​​​​​?

नियमों के तहत एसपीजी सुरक्षा प्राप्त लोगों को सुरक्षाकर्मी, उच्च तकनीक से लैस वाहन, जैमर और उनके कारों के काफिले में एक एम्बुलेंस मिलती है। सरकार ने इस साल अगस्त में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की एसपीजी सुरक्षा हटायी थी।

संसद द्वारा 1988 में लागू एसपीजी कानून को शुरुआत में केवल देश के प्रधानमंत्री और 10 वर्षों के लिए पूर्व प्रधानमंत्रियों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए बनाया गया था। 2003 में कानून में संशोधन किया गया और 10 साल की अवधि घटाकर एक साल कर दी गई।

राजीव गांधी की हत्या के बाद पूर्व प्रधानमंत्रियों के करीबी परिजनों को इस सुरक्षा घेरे में शामिल करने के लिए कानून में संशोधन किया गया जिससे सोनिया गांधी के साथ-साथ उनके बच्चों को एसपीजी सुरक्षा मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

देश में प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए अलग बल बनाने की जरूरत तब महसूस की गई जब 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके अंगरक्षकों ने हत्या कर दी थी।

उनकी हत्या के बाद देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा की समीक्षा करने के लिए एक समिति गठित की गई।

उसने विशेष सुरक्षा समूह के गठन की सिफारिश की। 1985 में महानिरीक्षक रैंक के अधिकारी को इसका पहला निदेशक नामित किया गया।

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