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मराठा समाज के लिए आखिर क्यों अहम है पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट ?

Written By Dinesh Mourya | Mumbai | Published:

राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग महाराष्ट्र सरकार को मराठा आरक्षण पर अपनी रिपोर्ट सौंपने को तैयार है. पूरे मराठा समाज की नजर इस रिपोर्ट पर है. यह रिपोर्ट तय करेगा की मराठों के आरक्षण की मांग का भविष्य क्या होगा. इस रिपोर्ट की अहमियत बताने से पहले हम आपको ले चलतें हैं उन घटनाओं की ओर जिनकी वजह के पिछड़ा वर्ग आयोग को यह काम सौंपा गया. 

उग्र मराठा आंदोलन

कई दशकों तक मराठा समाज इस राज्य का सबसे ताकतवर समाज रहा हैं. लेकिन पिछले कुछ वर्षो से मराठा समाज आरक्षण की मांग को लेकर लगातार सड़कों पर उतर रहा है. इसी साल महाराष्ट्र के कई इलाकों में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए, प्रदर्शनकारियों ने कई गाड़ियों को आग लगा दिया था, पुलिस पर पथराव किया था करीब 8 मराठा समाज के लोगों ने कथित तौर पर आरक्षण की मांग को लेकर खुदकुशी तक कर ली थी. 

मराठा समाज की दलील

मराठा समाज के लोगोंं का दावा हैं कि, उनकी जाती के लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति काफी खराब हैं. कहने के लिए वो अगडे हैं लेकिन ना तो उनके बच्चों को सरकारी नौकरियां​​​​​​​ मिल रहीं हैं और ना ही कॉलेजों में दाखिले. आरक्षण ना होने की वजह से उनके बच्चे प्रतिस्पर्धा के इस दौर में काफी पीछे रह जा रहें हैं. 

2014 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के ठीक पहले तत्कालीन कांग्रेस एनसीपी की सरकार ने मराठों को 16 प्रतिक्षत आरक्षण का ऐलान किया था लेकिन इस फैसले के खिलाफ मुंबई हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई, इसपर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार के आदेश पर रोक लगा दी, क्योंकि, महाराष्ट्र में पहले से ही 50 फिसदी से ज्यादा का आरक्षण दिया गया हैं और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, आरक्षण सिर्फ 50 प्रतिशत होना चाहिए.

पिछड़ा वर्ग आयोग को जिम्मेदारी:

मराठा समाज की तरफ से भारी दबाव के चलते फडणवीस सरकार ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को राज्य में मराठी समुदाय के मौजूदा समाजिक, आर्थिक और शिक्षा की स्थिति का गहन अध्ययन कर रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा. पिछड़ा वर्ग आयोग ने 5 एजेंसियों​​​​​​​ को राज्य के मराठाओं के डाटा जमा करने का आदेश दिया,

करीब 45 हजार से ज्यादा मराठा परिवारों का डाटा स्टडी किया गया. इसके अलावा आयोग ने मराठा समाज के प्रतिष्ठित लोगों की एक कमिटी भी बनाई भी, लोगों से उनके सुझाव भी मांगे गए. इकठ्ठा किए गए डाटा का गहन अभ्यास और समीक्षा करने के बाद आयोग की तरफ से एक रिपोर्ट बनाई गई और अब ये रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपा जाएगा. 

अगर पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट मराठाओं के पक्ष में रहा तो आरक्षण का रास्ता खुल जाएगा लेकिन अगर यह रिपोर्ट नेगेटिव​​​​​​​ रहा तब आरक्षण मिलना मुश्किल हो जाएगा. 15 नवंबर को सरकार को पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को हाईकोर्ट में सौंपना हैं.

आपको बतां दें कि, महाराष्ट्र में मराठाओं की आबादी 32 फिसदी से ज्यादा हैं और महाराष्ट्र की सियासत में मराठा मतदाता सबसे अहम भुमिका निभाते हैं. कानूनी अडचणों के बावजूद आरक्षण के मुद्दे पर सभी विपक्षी दलों ने मराठाओं का साथ देकर बीजेपी को कटघरें में खड़ा करने की कोशीश की हैं. फडणवीस ब्राह्मण  समाज से आते हैं और महाराष्ट्र में मराठा और ब्राह्मण समुदाय में संघर्ष का बड़ा इतिहास रहा हैं ऐसे में विपक्षी दल इसे मराठा बनाम ब्राह्मण करने की कोशिश कर सकतें हैं.

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