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प्रकाश अंबेडकर के विवादित बोल - 'जब राष्ट्रगान है तो राष्ट्रगीत की क्या जरूरत ?'

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

भारिप बहुजन महासंघ के अध्यक्ष एडवोकेट प्रकाश आंबेडकर ने वंदे मातरम पर विवादित बयान दिया है. उन्होंने कहा कि जो लोग वंदे मातरम बोलते हैं वे एंटी इंडियन हैं. राष्ट्रगान (जन गम मन ) के होते हुए भी वंदे की क्या जरूरत है ?

बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर ने कहा , जन गण मन राष्ट्रगान है न कि वंदे मातरम . जब आधिकारिक राष्ट्रगान मौजूद है तो किसी दूसरी चीज की किया जरूरत . वंदे मातरम गाने वालों को भारतीय और नहीं गाने वाले को गैर भारतीय है. लोगों को राष्ट्रभक्ति का सर्टिफिकेट देने वाले '' वो'' कौन होते हैं. ?

दरअसल कुछ समय पहले असदुद्दीन ओवैसी समेत कई मुस्लिम नेताओं ने इसे ना गाने की जिद पकड़ी हुई थी. उन मुस्लिम नेताओं का तर्क है कि राष्ट्रगीत वंदेमातरम एक धर्म विशेष के हिसाब से भारतीय राष्ट्रवाद को परिभाषित करता है और इस गीत में धार्मीक पहलू भी है. 


प्रकाश अंबेडकर राष्ट्रगीत के बहाने मुस्लिमों को अपने पक्ष में करना चाहते हैं और दलित मुस्लिम एकता की पैरोकारी कर रहे हैं. 

रिपोर्ट के अनुसार प्रकाश अंबेडकर ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए महाराष्ट्र में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के साथ गठबंधन किया है. इसी मुद्दे पर जब पत्रकारों ने अंबेडकर से इस गठबंधन पर सवाल पुछे कि ओवैसी तो राष्ट्रगीत का विरोध करते हैं तो ऐसे में उनका इस विवाद पर क्या कहना है ? इसी सवाल के जवाब में प्रकाश अंबेडकर ने बयान देते हुए इसपर असदुद्दीन ओवैसी के स्टैंड से अपना सहमति जता दी.  अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रकाश अंबेडकर का यह बयान क्या राजनैतिक विमिर्श में आएगा ? और इसपर अपनी राय रखने के लिए #MyVandeMataram के साथ ट्वीट करें. 

 

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