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बंगाल में रथ यात्रा की अनुमति देने वाले एकल पीठ के आदेश को खंडपीठ ने रद्द किया

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की रथ यात्रा को झटका लगा है.  कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की ‘रथ यात्रा’ को अनुमति देने वाला एकल पीठ का आदेश शुक्रवार को रद्द कर दिया. हाईकोर्ट की डिविजन बेंच द्वारा बीजेपी की रथ यात्रा पर रोक लगाने के बाद कोर्ट में सरकार का पक्ष रखने वाले वकील ने कहा कि यह सरकार की जीत है. कानून - व्यवस्था हमारी प्राथमिकता है. 

बता दें मुख्य न्यायाधीश देबाशीष कारगुप्ता और न्यायमूर्ति शम्पा सरकार की खंडपीठ ने मामला वापस एकल पीठ के पास भेजते हुए कहा कि वह इस पर विचार करते वक्त राज्य सरकार की ओर से दी गई खु्फिया जानकारी को ध्यान में रखे  
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भाजपा द्वारा पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित रथ यात्रा को कलकत्ता हाई कोर्ट से मंजूरी मिलने के बदा ममता सरकार ने डिवीजन बेंच के पास पहुंची थी. बता दें , ममता सरकार ने राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने का तर्क देते हुए यात्रा की अनुमति देने से इन्कार किया था. हाईकोर्ट की मुख्यं न्यायाधीश की खंडपीठ सुनवाई के लिए तैयार हो गया था. इसके साथ ही कलकत्ता हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी को डीजीपी और एडीजी  लॉ ऐंड ऑर्डर की तरफ से बहस में शामिल होने की अनुमति भी दे दी थी.  

बता दें , भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में अपनी 'गणतंत्र बचाओं यात्रा' की शुरुआत 22 दिसंबर को कूच बिहार से करने वाली थी. कलकत्ता हाई कोर्ट  रथ यात्रा को मंजूरी मिलने के बाद ममता सरकार ने फैसला अपने हक  में न आने पर चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच से इसपर निर्णय देने को कहा है.  दो न्यायाधीशों की पीठ ने यह आदेश राज्य सरकर की अपील पर सुनवाई के बाद दिया जिसमें उसने एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी थी.

एकल पीठ ने आदेश सुनाते हुए भाजपा को भी स्पष्ट किया है कि यात्रा कानून के दायरे में रहते हुए निकाली जाएगी. अगर इस दौरान सरकारी संपत्ति का नुकसान होता है तो इसके लिए भाजपा जिम्मेदा होगी. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें सांप्रदायिक तनाव की आशंका जताई गई थी. साथ ही आदेश दिया गया है कि किसी भी जिले में भाजपा की रथयात्रा के प्रवेश से कम से कम 12 घंटे पहले उक्त जिले के पुलिस अधीक्षक को सूचित कर दिया जाए. यात्रा की वजह  से ट्राफीग बाधित नहीं हो. अदालत ने पुलिस अधिकारियों को भी पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने के साथ सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि कहीं भी कानून का उल्लंघन ना हों.