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ऑपरेशन 'वोट का ठेका' पर R. भारत की SIT का खुलासा: कैमरे पर बोले जेडीयू के दलित नेता विद्यानंद विकल- "सबको मिलेगा हिस्सा, बूथ तक पहुंचा पैसा"

Written By Neeraj Chouhan | Mumbai | Published:

लोकसभा चुनाव यानि लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व, जहां एक वोट की ताकत इतनी की सरकार बना दे और गिरा दे। वोट किसी को धूल चटा दे तो किसी को संसद में पहुंचा दे। और इस वोट को हासिल करने के लिए क्या छोटे नेता क्या बड़े नेता , हर कोई चुनावी समर में कूद चुका है। जनता से एक एक वोट की गुहार लगा रहा है।

तो आज की तारीख में सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या जनता हमेशा अपने हिसाब से वोट करती है या फिर उसका वोट मैनेज हो सकता है, उसका वोट खरीदा जा सकता है। ये सवाल हम इसलिए पूछ रहे हैं क्योंकि लोकतंत्र के महापर्व में अब कुछ ही दिन रह गए हैं और देश जानना चाहता है कि इस बार जनादेश किसको मिलने वाला है।

लेकिन रिपब्लिक भारत पर आज देश देखेगा वो सच जो आपको अंदर से हिला देगा। आप चौंक जाएंगे कि आखिर ऐसा भी हो सकता है कि क्या इस तरीके से हमारे जनप्रतिनिधि चुने जाते हैं? क्या यही है चुनाव की हकीकत क्या यही है वोट हासिल करने का तरीका? ऑपरेशन वोट का ठेका में रिपब्लिक भारत की स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम यानी एसआईटी करेंगे उन चेहरों को बेनकाब जो पैसे के दम पर वोट का सौदा करते हैं। 

तो आइए और मिलिए जनता के उन नुमाइंदो से जो आपको किसी को भी नेता बनाने का उनको वोट दिलाने का उन्हें एमएलए और एमपी बनाने का ठेका लेते हैं।

अब इनसे मिलिए विकल साहब से। जो एससी एसटी कमीशन के पूर्व चेयरमैन हैं और बिहार में दलित राजनीति का जाना माना चेहरा। जनता दल यूनाइटेड से 2020 में फिर से विधायक बनने का सपना आंखों में संजोए हुए हैं और उनके पास  सुनिए विधायक बनने का क्या फॉर्मूला है।

  • रिपोर्टर- एक वोट का

विद्यानंद विकल- वोट का नहीं। जो पोलिंग बूथ पर बैठता है दो आदमी, एजेंट उसके लिए।

विद्यानंद विकल- और अलग से मोहल्लों में जो लीडिंग है उसको लोग दे देता है। अब तो ऐसा हो गया है कि एक एक आदमी पैसे के लिए दौड़ जाता है

  • रिपोर्टर- तो पैसा पर वोट मिलता है।

विद्यानंद विकल- पैसा पर वोट, यानि की हर घर पीछे 500 रुपया जाके थमा दिया। सेक्टर बांट दिया, इस सेक्टर का कौन है भाई, तो ये है...उनको दे दिया कि कितना घर है।

  • रिपोर्टर- आप लोगों के पास कैश इतना आता कहां से है।
  • रिपोर्टर- 2 – नोटबंदी हो गई है अब तो,
  • रिपोर्टर- कैश तो है ही नहीं तो कैश लाते कहां से है.. ?

विद्यानंद विकल- कैश तो सब कैपिटलिस्ट ग्रुप है वो दे देता है। वो सब वसूलता है बाद में।

तो विकल साहब ने खुलासा कर दिया कि अगर किसी खास जाति के वोट खरीदे नहीं जा पाए तो पैसे देकर उस वोट बैंक को निष्क्रिय कर देते है। लेकिन नोटबंदी के बाद कैश को लाने ले जाने में खासा मशकक्त करनी पड़ रही है। खतरा बढ़ गया है लेकिन चुनाव लड़ना है तो रोकड़ा जरुरी है

विद्यानंद विकल- आजकल देश में चुनाव के टाइम पर देख ही रहे है पैसा भी पहुंचाना पकड़ाना

  • रिपोर्टर- नोटबंदी जीएसटी, इस सबका कोई फर्क नहीं है...

विद्यानंद विकल- हम लोग चलते हैं ना तो 10 हजार रुपया अगर रखना है तो एक जगह नहीं रखेगा, एक पॉकेट में...हम आपको बता रहे हैं, ये डॉयरेक्शन है नीतिश जी का। 10 हजार रुपया भी आपको एक जगह नहीं रखना है। इस पॉकेट में 5 हजार रख लीजिए, दो हजार यहां तो तीन हजार यहां रख लीजिए।

विद्यानंद विकल- आज की तारीख में पैसा बूथ तक पहुंचाना साधारण बात नहीं है।

  • रिपोर्टर- तो कैसे पहुंचाते है

विद्यानंद विकल- जैसे आप हैं ना क्षेत्र में, इनके पास होगा ही एक –आध लाख रुपया। तो हो गया आप अपने अकॉउंट से निकाल कर दे दिए इस आदमी को यही सब होता है। नहीं तो ये यहां से लेकर जा रहा है बड़ा मुश्किल हो गया है।

तो देख रहे हैं आप, कैसे कैसे वोट दिलाने के नाम पर धंधा हो रहा है। कैसे वोट के ठेकेदार, जनता के वोट का सौदा कर रहे हैं। कैसे एमपी एमएलए बनाने का ठेका लिया और दिया जा रहा है। 

 

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