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राम मंदिर पर घमासान जारी, CM योगी ने कांग्रेस, सपा और बसपा पर किया तीखा हमला

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

राम के नाम पर घमासान का दौर जारी है, जहां एक तरफ सत्ता के महामुकाबले के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है तो वहीं सियासत में राम का मुद्दा ठंडा होने का नाम नहीं ले रहा है। सैकड़ों साल पुराने अयोध्या में पनपे राम मंदिर और बाबरी विवाद की जंग थम नहीं रही है।

इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी विपक्ष पर बड़ा हमला किया है और राम मंदिर को लेकर सीधे तौर पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को निशाने पर लिया। 

उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि राम मंदिर राम मंदिर को लेकर सबसे बड़ा रोड़ा कांग्रेस, सपा और बसपा है।

इसके अलावा राम जन्मभूमि के पुजारी सत्येंद्र दास ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा है। सत्येंद्र दास ने कहा है कि गांधी परिवार से कोई भी अयोध्या नहीं आया है। कांग्रेस के नेता राम मंदिर नहीं बनने देंगे।

बता दें, निर्मोही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि मध्यस्थता के लिए दो और रिटायर्ड जजों को पैनल में शामिल किया जाए। इसके अलावा इनकी मांग है कि मध्यस्थता को लेकर बैठक फैजाबाद में न हो, बल्कि ये दिल्ली या फिर किसी दूसरी न्यूट्रल जगह पर कराई जाए। 

क्या मध्यस्थता से सुलझेगा मसला?

  • मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट में अर्जी
  • निर्मोही अखाड़े ने दायर की याचिका
  • मध्यस्थता आदेश में सुधार की मांग
  • जजों को मध्यस्थ बनाने की मांग
  • तटस्थ जगह पर मध्यस्थता की मांग

ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि आखिर राम मंदिर निर्माण में रोड़े कौन अटका रहा है? राम मंदिर पर आखिर कब तक होगी सुनवाई? दरअसल राम मंदिर विवाद सुलझाने के लिए 8 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने मध्‍यस्‍थता के आदेश दिए थे। मध्‍यस्‍थों में तीन सदस्‍यों को शामिल किया गया है। 

इसे भी पढ़ें - राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर आखिरी फैसला कब? हिंदू पक्ष ने मध्यस्थता से किया साफ इनकार

मध्‍यस्‍थता बोर्ड के सदस्‍यों में श्रीश्री रविशंकर, श्रीराम पंचू और एमएफ कलिफुल्‍लाह हैं, निर्मोही अखाड़ा की दलील है कि फैजाबाद सुरक्षित जगह नहीं है। ऐसे में यहां लोगों को आने से धमकी भी मिल सकती है, बता दें कि निर्मोही अखाड़ा प्रमुख पक्षकार है।

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