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उन्नाव बलात्कार मामले के दोषियों को एक महीने के भीतर फांसी हो : मालीवाल

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) की प्रमुख स्वाति मालीवाल ने शनिवार को उन्नाव बलात्कार मामले के आरोपियों को एक महीने के अंदर फांसी दिए जाने की मांग की।

बलात्कार के दोषियों को दोषसिद्धि के बाद छह महीने के भीतर फांसी की सजा देने की मांग को लेकर तीन दिसम्बर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठीं डीसीडब्ल्यू की प्रमुख ने कहा, ‘‘मैं उत्तर प्रदेश और केन्द्र सरकार से अपील करती हूं कि मामले पर त्वरित कार्रवाई करे और सुनिश्चित करे कि दोषियों को एक महीने के अंदर फांसी की सजा दी जाए।’’

उन्नाव बलात्कार पीड़िता की मौत के बाद डीसीडब्ल्यू प्रमुख स्वाति मालीवाल ने शनिवार को सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वह ‘‘बहरी’’ एवं ‘‘असंवेदनशील’’ है और बलात्कार पीड़िताओं की ‘‘चीखें’’ उसे सुनाई नहीं देती।

उन्होंने कहा कि वह अपने देश की सरकार पर ‘‘शर्मिंदा’’ है।

गौरतलब है कि आग के हवाले की गई उन्नाव बलात्कार पीड़िता ने शुक्रवार देर रात यहां सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया। बलात्कार के आरोपियों सहित पांच लोगों ने उसे अदालत जाते समय आग के हवाले कर दिया था। दिल्ली यातायात पुलिस ने पीड़िता को हवाई अड्डे से सफदरजंग अस्पताल तक ले जाने के लिए ग्रीन कॉरीडोर बनाया था। उसे लखनऊ से दिल्ली एयर एम्बुलेंस के जरिए लाया गया था।

इससे पहले दिन में डॉ. कुमार ने कहा था कि मरीज की हालत बहुत गंभीर है और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। उन्होंने बताया था कि पीड़िता के महत्वपूर्ण अंग ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।

पीड़िता ने एसडीएम दयाशंकर पाठक के सामने दिए बयान में बताया था कि वह मामले की सुनवाई के लिए रायबरेली जा रही थी। जब वह गौरा मोड़ के पास पहुंची थी तभी पहले से मौजूद गांव के हरिशंकर त्रिवेदी, रामकिशोर त्रिवेदी, उमेश बाजपेयी और बलात्कार के आरोपी शिवम त्रिवेदी, शुभम त्रिवेदी ने उस पर हमला कर दिया और उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि शिवम और शुभम त्रिवेदी ने दिसंबर 2018 में उसे अगवा कर उससे बलात्कार किया था। हालांकि इस संबंध में प्राथमिकी मार्च में दर्ज की गई थी।

पुलिस के अनुसार पीड़िता अधजली अवस्‍था में काफी दूर तक दौड़ कर आयी। प्रत्‍यक्षदर्शियों ने जब उसे देखा तो पुलिस को इसकी सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने पीड़िता को पहले सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र भेजा जहां से उसे जिला अस्‍पताल रेफर किया गया। बाद में जिला अस्‍पताल के डॉक्‍टरों ने उसकी स्थिति गंभीर देखते हुए लखनऊ के लिए रेफर कर दिया था, जहां से उसे दिल्ली लाया गया।

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