सांकेतिक तस्वीर
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'चमकी' बुखार से बिहार के मुजफ्फरपुर में हाहाकार, मौत का आंकड़ा पहुंचा 40 के पार, क्या हैं इसके लक्षण, कारण, इलाज और बचाव?

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

बिहार के मुजफ्फरपुर में इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम नाम की बीमारी से 40 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है, ये आंकड़ा सरकारी है, माना जा रहा है कि इससे कहीं अधिक बच्चों की मौत पिछले 13 दिनों में हो चुकी है।

डॉक्टर इसे ए क्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम का नाम दे रहे हैं जिसमें मस्तिष्क ज्वर या जापानी बुखार जैसे कई लक्षण नजर आ रहे हैं। डॉक्टरों का मानना है किया इस बीमारी का कारण तेज गर्मी है, सबसे अहम बात ये ये कि स्वास्थ्य विभाग के तमाम अधिकारी इस बीमारी को लेकर कोई साफ नतीजे पर नहीं पहुंच पा रहे हैं, इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी बीमारी के कारण जानने की कोशिश की है, लेकिन बच्चों की मौत का सिलसिला बदस्तूर जारी है।

अब तक हुई बच्चों की मौत

  • वर्ष 2010 में 59 बच्चे पीड़ित हुए, जिनमें 24 बच्चों की मौत हो गई।,वर्ष 2011 में 121 बच्चे पीड़ित हुए, जिनमें 45 बच्चों की मौत हो गई। वर्ष 2012 में 336 बच्चे पीड़ित हुए, जिनमें 120 बच्चों की मौत हो गई। वर्ष 2013 में 124 बच्चे पीड़ित हुए, जिनमें 39 बच्चों की मौत हो गई। वर्ष 2014 में 342 बच्चे पीड़ित हुए, जिनमें 86 बच्चों की मौत हो गई। वर्ष 2015 में 75 बच्चे पीड़ित हुए, जिनमें 11 बच्चों की मौत हो गई। वर्ष 2016 में 42 बच्चे पीड़ित हुए, जिनमें 21 बच्चों की मौत हो गई। वर्ष 2017 में 42 बच्चे पीड़ित हुए, जिनमें 19 बच्चों की मौत हो गई। वर्ष 2018 में 45 बच्चे पीड़ित हुए, जिनमें 10 बच्चों की मौत हो गई।

क्या है चमकी बुखार

  • लगातार तेज बुखार चढ़े रहना, बदन में लगातार ऐंठन होना​​​​​​​​​​​​​​, दांत पर दांत दबाए रहना​​​​​​​​​​​​​​, सुस्ती चढ़ना​​​​​​​, कमजोरी की वजह से बेहोशी​​​​​​​​​​​​​​, शरीर सुन्न हो जाना​​​​​​​​​​​​​​, बच्चों में शुगर की कमी हो जाना​​​​​​​

क्या है उपचार​​​​​​​

  • शरीर में पानी की कमी न होने दें, बच्चों को सिर्फ हेल्दी फूड दें, रात के खाने के बाद मीठा भी खिलाएं​​​​​​​​​​​​​​, थोड़ी-थोड़ी देर बार तरल पदार्थ दें, किन बातों का रखें ध्यान, बच्चों को झूठे और सड़े फल न खाने दें​​​​​​​, सूअर रहने वाली जगह पर न जाने दें, साफ-सफाई का ख्यार रखें​​​​​​​​​​​​​​, पीने का पानी स्वच्छ रखें​​​​​​​​​​​​​​, गंदगी भरे इलाकों से दूर रखें। 

डॉक्टरों का मानना है कि इस बीमारी का कारण तेज़ गर्मी है, सबसे अहम बात ये है कि स्वास्थ्य विभाग के तमाम अधिकारी इस बीमारी को लेकर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रहे हैं,
 इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी बीमारी के कारण जानने की कोशिश की है, लेकिन बच्चों की मौत का सिलसिला बदस्तूर जारी है। 
 

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