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अभी भी बहुत कुछ करने की ख्वाहिशें बाकी हैं : पंडित जसराज

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

उम्र के नौ दशक पूरे करने के बावजूद कोलकाता में पिछले दिनों लगातार ढाई घंटे गाने वाले पंडित जसराज के लिये संगीत ‘संजीवनी’ है और उनका मानना है कि सरगम के इस सफर में अभी कई पड़ाव आने बाकी हैं ।

28 जनवरी 1930 को हिसार में जन्में महान शास्त्रीय गायक पंडित जसराज ने अपने जन्मदिन पर भाषा को दिये खास इंटरव्यू में कहा ,‘‘ संगीत ही मेरी ऊर्जा का स्रोत है । पता ही नहीं चलता कि संगीत कैसे ऊर्जा देता है पर देता जरूर है ।’’

देश विदेश में सैकड़ों बार गा चुके जसराज को आज भी 1952 में तत्कालीन नेपाल नरेश त्रिभुवन विक्रम के सामने दी गई वह प्रस्तुति याद है जिसके लिये उन्हें पुरस्कार में मोहरें मिली थीं ।

उन्होंने कहा ,‘‘ मुझे आज भी याद है जब मुझे करीब 5000 मोहरें दी गई थीं और मैं यह जान कर लगभग बेहोश हो गया था कि गाने के लिये पैसे भी मिलते हैं ।’’

हाल ही में इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन (IAU) ने एक सूक्ष्म ग्रह का नाम 'पंडित जसराज' के नाम पर रखा है और यह सम्मान पाने वाले वह पहले भारतीय कलाकार बन गए।

इस सम्मान पर उन्होंने कहा ,‘‘ अब समझ में आ रहा है कि क्या हो गया है । पहले तो समझ में ही नहीं आया कि क्या होने जा रहा है । बहुत बड़ी बात है ।’’

देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मविभूषण (2000 में) से नवाजे जा चुके जसराज को 1975 में पद्मश्री सम्मान मिला था जिस पर वह इतने हैरान हुए थे कि उन्होंने चुप्पी ही साध ली थी ।

उन्होंने पुरानी यादों की परतें खोलते हुए कहा ,‘‘ मुझे पद्मश्री 1975 में मिला था और तब मैं हैरान हो गया था कि मुझे यह सम्मान कैसे मिल गया । मैंने चुप्पी साध ली थी और किसी से कोई बात नहीं की । मुझे यकीन करने में काफी समय लगा । मैं उस समय अपने बच्चों को गाना सिखा रहा था और हम नेपाल जाने की तैयारी कर रहे थे । फोन पर मुझे बताया गया कि भारत सरकार आपको पद्मश्री देना चाहती है तो हमने कहा कि सरकार जो चाहे, दे दे ।’’

अब तक कई पुरस्कार और सम्मान पा चुके संगीत मार्तंड जसराज ने कहा ,‘‘ हर पुरस्कार अहम होता है, कुछ ना कुछ दे ही जाता है और कुछ अलग करने के लिये बाध्य करता है । यह ध्यान रखना चाहिये कि जिसके लिये सम्मान आपको मिल रहा है, उसे जारी रखें और उस पर जोर दें ।’’

इस बार भी पंडित छन्नूलाल मिश्र समेत संगीत से जुड़ी कई हस्तियों को केंद्र सरकार ने पद्म सम्मान देने की घोषणा की है ।

इस बारे में पूछने पर जसराज ने कहा ,‘‘ अच्छा है कि संगीतकारों को सम्मान मिल रहा है । कभी कम मिलता है , कभी ज्यादा । चलता रहता है । छन्नूलालजी तो हमारे बहुत अच्छे दोस्त हैं और दोस्त को कुछ मिलने पर ज्यादा खुशी होती है । वह बहुत बड़े कलाकार हैं ।’’

नये दौर के संगीत के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि वह दुनिया भर का संगीत सुनते हैं और अच्छे संगीत की सराहना करते हैं ।

उन्होंने कहा ,‘‘ पसंद नापसंद की बात नहीं है । मैं सिर्फ संगीत सुनता हूं और दुनिया भर का संगीत सुनता हूं । जो अच्छा रिकार्ड आ जाता है, उसे सुन लेते हैं । जगजीत सिंह की ग़ज़ल ‘सरकती जाये रूख से नकाब आहिस्ता ’ को मैने बहुत बार सुना । आज भी यह मुझे बहुत पसंद है ।’’

आधुनिक तकनीक से भी उन्हें कोई गुरेज नहीं है । उन्होंने कहा ,‘‘ तकनीक मुझे अच्छी लगती है । यह तो सहायक है ।’’

इतने लंबे सफर के बाद क्या कोई ख्वाहिश अधूरी रह गई , यह पूछने पर उन्होंने कहा ,‘‘ गालिब ने कहा है .... हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले । इतने बड़े शायर जब यह बात कह गए, तो हम तो बहुत पीछे हैं । किसी भी इंसान की ख्वाहिश कभी पूरी नहीं होती ।’’

उन्होंने कहा ,‘‘ मैने कभी सोचा या चाहा भी नहीं , वो चीजें भगवान से मिल गईं तो अब क्या चाहूं या क्या कहूं । पद्मश्री मिला तो मेरी आधी जान निकल गई थी । उसके बाद पद्मविभूषण तक मिला । बिना सोचे यहां तक आ गए तो आगे पता नहीं ईश्वर ने क्या लिखा है, उन्हीं पर छोड़ देते हैं ।’’

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