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राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद: नेताओं ने न्यायालय के फैसले का स्वागत किया

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद का सर्वमान्य समाधान खोजने के लिये मध्यस्थता समिति गठित करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने स्वागत किया है। शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश एफएमआई कलीफुल्ला इस समिति की अध्यक्षता करेंगे।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की नेता वृंदा करात ने कहा कि पूर्व में मध्यस्थता के प्रयास परिणाम देने में विफल रहे लेकिन इस बार उच्चतम न्यायालय इसकी निगरानी कर रहा है तथा सभी पक्षों ने अदालत के फैसले पर सहमति जताई है और यह देखना होगा कि परिणाम क्या निकलता है।

बसपा नेता मायावती ने इस कदम को “प्रशंसनीय” बताया है। 

उन्होंने ट्विटर पर कहा, “अयोध्या मामले के समाधान के लिए बंद कमरे में (फैजाबाद में) मध्यस्थता के लिए समिति गठित करने का माननीय उच्चतम न्यायालय का फैसला ईमानदार प्रयास लगता है। माननीय अदालत का “संबंधों में सुधार लाने की संभावना” तलाशना एक सराहनीय कदम है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) इसका स्वागत करती है।” 

AIMIM प्रमुख असदउद्दीन ओवैसी ने स्पष्ट तौर पर श्री श्री रविशंकर की ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्हें ‘‘निष्पक्ष” तरीके से काम करना चाहिए। 

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “बेहतर होता अगर उच्चतम न्यायालय एक निष्पक्ष व्यक्ति को नियुक्त करता। समिति के एक सदस्य ने मुस्लिमों को धमकाया था कि भारत सीरिया बन जाएगा और मैं उम्मीद करता हूं कि मध्यस्थता समिति में रहने के दौरान वह उन विचारों को अपने दिमाग से बाहर रखेंगे। हम फैसले का स्वागत करते हैं।” 

उच्चतम न्यायालय ने समिति को अपनी कार्यवाही पूरी करने के लिए आठ हफ्ते का वक्त दिया है। 

मध्यस्थता के लिये गठित समिति के अन्य सदस्यों में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पांचू शामिल हैं। आवश्यकता हो तो, इसमें और सदस्य शामिल किए जा सकते हैं। 

रविशंकर ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का फैसला देश के हित में है। 

उन्होंने ट्वीट किया, “उच्चतम न्यायालय का मध्यस्थता का आदेश देना देश एवं सभी संबंधित पक्षों के हित में है। इस ज्वलंत मुद्दे को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने में हमें कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए। हमें अपने मतभेदों एवं अहं को अलग रखकर संबंधित समुदायों की भावनाओं को साथ लेकर चलते हुए एवं उनका सम्मान करने के भाव से एक साथ आना चाहिए। हर किसी का सम्मान करते हुए, सपनों को हकीकत में बदलते हुए, लंबे समय से चले आ रहे विवाद को खुशी-खुशी खत्म करते हुए और समाज में सौहार्द बरकरार रखते हुए - हम सभी को इन लक्ष्यों की दिशा में साथ आना चाहिए।”

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