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राहुल गांधी की अडवाणी को लेकर 'बदजुबानी' पर बोलीं सुषमा स्वराज, कहा - 'भाषा की मर्यादा रखें राहुल'

Written By Amit Bajpayee | Mumbai | Published:

कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने लालकृष्ण आडवाणी की आड़ में पीएम मोदी पर बदजुबानी करते हुए कहा कि ‘‘भाजपा हिंदुत्व की बात करती है। हिंदुत्व में गुरु सर्वोच्च होता है। वह गुरु शिष्य परंपरा की बात करती है। मोदी के गुरु कौन हैं? आडवाणी हैं। मोदी ने आडवाणी को जूता मारके स्टेज से उतारा।’’

वैसे तो नेताओं की बदजुबानी कोई नई बात नहीं है लेकिन चुनावी मौसम में एक दूसरे पर कीचड़ उछालने का काम जोरों पर है। और बदजुबानी के इस खेल में सबसे आगे निकल चुके हैं राहुल गांधी। मोदी की आंधी से घबराए राहुल ने अब सारी हदें पार कर दी हैं। लालकृषण आडवाणी और मोदी को लेकर राहुल ने वो बयान दिया है जिससे सीधा राहुल और कांग्रेस के संस्कार पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

1990 में 'राम रथ यात्रा' के जरिए देश की राजनीति को नई दिशा देने वाले लालकृष्ण आडवाणी किसी परिचय के मोहताज नहीं। आडवाणी देश और बीजेपी के बुजुर्ग नेताओं की कतार में सबसे आगे खड़े हैं। उनका राजनीतिक करियर ही 70 साल से ज्यादा लंबा है। यानी वो हर हाल में सम्मान के हकदार हैं। लेकिन ये बात देश की करीब 134 साल पुरानी पार्टी कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी भूल गए। हम आपको उनकी इस भूल की वजह भी बताएंगे। क्योंकि ये अनजाने में नहीं हुई बल्कि जानबूझकर की गई। राहुल को आशंका है कि 2014 के चुनाव की तरह इस बार भी 'मोदी' नाम की आंधी आने वाली है, यानी उन्हें फिर से हार का डर सताने लगा है। यही वजह रही कि चुनाव में संभावित शिकस्त से घबराए राहुल बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बदजुबानी पर उतर आए।

राहुल ने आडवाणी का टिकट कटने के बाद सामने आए उनके एक ब्लॉग को लेकर तंज कसा। मोदी और आडवाणी के खिलाफ राहुल के इन बेतुके बोल पर BJP भी भड़क गई। राहुल की बदजुबानी पर बीजेपी नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया के बीच पार्टी नेता और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्विटर पर लिखा कि ' राहुल जी. अडवाणी जी हमारे पिता तुल्य हैं. आपके बयान ने हमें बहुत आहत किया है. कृपया भाषा की मर्यादा रखने की कोशिश करें '

इसके बाद अमेठी से राहुल के खिलाफ चुनाव लड़ रहीं स्मृति ईरानी भी सामने आईं। जिन्होंने बिना वक्त गंवाएं राहुल के संस्कारों पर ही सवाल खड़े कर दिए।

हालांकि अपने विरोधियों को लेकर बदजुबानी सिर्फ राहुल गांधी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका नमूना रामपुर से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे आजम खान भी कई बार दिखा चुके हैं। इस बार उनके एक करीबी नेता और संभल से पार्टी के जिलाध्यक्ष फिरोज खान की बारी थी। जिन्होंने रामपुर से बीजेपी की प्रत्याशी जयाप्रदा के खिलाफ भाषा की सारी मर्यादा ही लांघ दी। उन्होंने जयाप्रदा की तरफ इशारा करते हुए कहा कि रामपुर की शामें अब रंगीन हो जाएंगी। ऐसे में R.भारत सवाल पूछता है कि चुनाव के वक्त ही क्यों नेता बदजुबानी पर उतर आते हैं। क्या वो ऐसा हार के डर की वजह से करते हैं।

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