Shiv Sena chief Uddhav Thackeray (File Photo | PTI)
Shiv Sena chief Uddhav Thackeray (File Photo | PTI)

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सुप्रीम कोर्ट का फैसला भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाने वाला दिन है : उद्धव ठाकरे

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अयोध्या विवाद पर शनिवार को उच्चतम न्यायालय के फैसले की प्रशंसा की और इसे भारत के इतिहास में ‘‘स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाने वाला दिन’’ बताया। उच्चतम न्यायालय के इस फैसले से पवित्र नगरी में राम मंदिर निर्माण की राहें खुल गयी हैं।

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद साझा करने के मुद्दे पर सरकार गठन को लेकर ठाकरे की पार्टी का भाजपा के साथ जबरदस्त विवाद चल रहा है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि वह 24 नवंबर को अयोध्या की यात्रा कर सकते हैं।

ठाकरे ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि फैसले से आखिरकार भगवान राम के जन्मस्थान को लेकर विवाद खत्म हो गया।

ठाकरे ने कहा, ‘‘प्रत्येक व्यक्ति को उच्चतम न्यायालय के फैसले से उम्मीद थी। मैं शिवसैनिकों से अपील करता हूं कि वे किसी की भावनाओं को आहत किये बगैर फैसले का जश्न मनायें...।’’

उन्होंने कहा कि उन्हें याद है जब उनके पिता और शिवसेना संस्थापक बाला साहब ठाकरे, विहिप नेता दिवंगत अशोक सिंघल, भाजपा के अटल बिहारी वाजपेयी, प्रमोद महाजन और एल के आडवाणी ने 1990 के दशक में राम जन्मभूमि आंदोलन का नेतृत्व किया था।

ठाकरे ने कहा, ‘‘पिछले साल 24 नवंबर को मैंने अयोध्या की यात्रा की थी और वहां पूजा-अर्चना की थी। मैं सरयू के तट पर ‘आरती’ में सम्मिलित हुआ था। मैं अपने साथ छत्रपति शिवाजी महाराज के जन्मस्थान शिवनेरी किले से वहां की मिट्टी लेकर गया था और राम मंदिर का निर्माण सुनिश्चित करने के लिये चमत्कार की प्रार्थना की थी। मुझे खुशी है कि एक साल के भीतर ही यह चमत्कार हो गया।’’

उच्चतम न्यायालय के फैसले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक अध्याय अब बंद हुआ और सभी के लिये यही उपयुक्त है कि एक नयी शुरुआत हो।

फैसले के मद्देनजर जमीनी हालात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘अगर प्रत्येक व्यक्ति आज की ही तरह समझदारी और परिपक्वता दिखाये तो हमारा देश सर्वशक्तिशाली बनेगा।’’

ठाकरे ने कहा कि वह आडवाणी से मिलना चाहेंगे जिन्होंने रथयात्रा की शुरुआत की थी।

ठाकरे ने कहा, ‘‘यह (रामजन्मभूमि आंदोलन) एक बड़ा आंदोलन था। कुछ लोग आज हमारे बीच नहीं हैं। कुछ ने आंदोलन के लिये अपना जीवन बलिदान किया। मैं उन सभी को सलाम करता हूं।’’

महाराष्ट्र में 288 सदस्यीय विधानसभा में 161 विधायकों का बहुमत होने के बावजूद भाजपा और शिवसेना सरकार गठन में नाकाम रहे हैं, जबकि मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल नौ नवंबर को खत्म हो गया।

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