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Republic Summit 2018 | पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के ऑनर योग गुरु बाबा रामदेव की जुबानी उनकी सफलता की कहानी..

Written By Amit Bajpayee | Mumbai | Published:

देश के सबसे हाई प्रोफाइल इवेंट रिपब्लिक समिट 2018 का आगाज हुआ. दो दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तमाम दिग्गज शामिल हुए. बुधवार को पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के ऑनर योग गुरु बाबा रामदेव और OYO के फाउंडर और मालिक रितेश अग्रवाल पहुंचे , इनसे रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी ने बात की.

कार्यक्रम में अपनी प्रेरणा के बारे में बताते हुए पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के ऑनर योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि, मैं एक अनपढ़ किसान के परिवार से आता हूं. और गुरुकुल में पढ़ाई की. लगभग 25 साल पहले योग क्लास शुरु की तो दो लोग मेरे पास योग सिखने आए थे. फिर दो सौ फिर दो हजार और आज तक मेंने 10 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष रुप से योग सिखाया है साथ ही भारत में 100 करोड़ से ज्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से पहुंचा हूं. तो मुझे गर्व है कि इस देश का वनवासी आदिवासी भी मुझसे प्यार करता है.

योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा मैने कभी रजाई ओढ़ी नहीं गर्म कपड़े पहने नहीं , अभी भी जमीन पर सोता हूं . लेकिन एक सपना है कि जब से मैं छोटा बच्चा था तब से 'भारत माता की जय' बोलता था और स्कूल में बचपन से 'मेरा भारत महान' लिखता था.  जबसे मेंने होश संभाला तो देखा कि 'भारत माता की जय' और 'मेरा भारत महान' बोलने से देश महान नहीं बनेगा. मैं इस देश के लिए कुछ ऐसा योगदान दूं कि मेरी की इकॉनामी  2045-50 तक अमरीका से ज्यादा मजबूत हो. मैं एक किसान का बेटा होने के नाते देश के किसान को मजबूत देखना चाहता हूं. इस देश के बिजनेस मेन समेत तमाम सेक्टर के लोगों को मजबूत देखना चाहता हूं. मेरे मूल में एक ही बात है कि मेरे द्वारा इस देश में कम से कम 5 करोड़ से ज्यादा लोगों का प्रत्यक्ष रुप से कुछ भला कर के जाऊं. अभी पतंजलि से लगभग पांच लाख लोगों को प्रत्यक्ष - अप्रत्यक्ष रुप से जॉब दिया है करीब एक करोड़ किसानों को अपने साथ जोड़ा है. आने वाले समय में लगभग 5 करोड़ किसानों को हम जोड़ेगें. 

योग गुरु ने कहा विदेशी कंपनीयों से मेरी खानदानी दुश्मनी नहीं है. क्योंकि मैं किसी बिजनेस कॉर्पोरेट हाऊस से तो हूं नहीं. न ही किसी पार्टी से मेरा कोई पुश्तैनी बेर हैं. एक संकल्प है कि विदेशी कंपनियां मुनाफे , रायल्टी , रॉ मैटीरियल , पेटेंट के नाम पर हर साल अरबों रुपये ले कर जाती है. भारतीय लोगों में क्या कमी है. सारे विदेशी कंपनीयों को चलाने वाले लोग हमारे भारतीय लोग हैं. तो जब सब कुछ हमारा  रॉ मैटीरियल हमारा , पैकेजिंग मैटीरियल  , प्रयोग करने वाला यूजर हमारा , मार्केट हमारी है तो जब सब कुछ हमारा है तो प्रौफिट भी हमारा होना चाहिए. पंतजली के पीछे का सच यह हैं


 

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