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सीएए के बाद देश से बाहर जाने वाले बांग्लादेशी प्रवासियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई: बीएसएफ

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

बीएसएफ ने शुक्रवार को कहा कि सीएए के लागू होने के बाद पिछले करीब एक महीने में स्वदेश लौटने वाले अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

अर्द्धसैन्य बल के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के क्रियान्वयन के बाद अवैध प्रवासियों के बीच डर के कारण यह संख्या बढ़ी।

बीएसएफ के महानिरीक्षक (साउथ बंगाल फ्रंटियर) वाई बी खुरानिया ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘पिछले एक महीने में सीमावर्ती देश जाने वाले अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है.... हमने केवल जनवरी में 268 अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को पकड़ा जिनमें से अधिकतर लोग पड़ोसी देश जाने की कोशिश कर रहे थे।’’

वहीं देश के 154 प्रबुद्ध नागरिकों ने शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा की अपील करते हुए संशोधित नागरिकता कानून के विरोध के नाम पर हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया ।

राष्ट्रपति से अपील करले वाले इन प्रबुद्ध नागरिकों में पूर्व न्यायाधीश, नौकरशाह, रक्षा कर्मी आदि शामिल हैं ।

पूर्व न्यायाधीश प्रमोद कोहली के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की और दावा किया कि कुछ राजनीतिक तत्वों के दबाव में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है ।

 

इधर  द्रमुक प्रमुख एम के स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु में पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्ष ने नागरिकता (संशोधन) कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के विरोध में शुक्रवार को ‘व्यापक’ हस्ताक्षर अभियान चलाने का संकल्प लिया।

उन्होंने कहा कि सीएए वापस लिया जाना चाहिए और तमिलनाडु में एनपीआर की गतिविधियां नहीं होने दिया जाना चाहिए और एनआरसी की तैयारी का प्रयास नहीं होना चाहिए।

इस संबंध में द्रमुक की अध्यक्षता वाली कांग्रेस और एमडीएमके समेत सहयोगी पार्टियों के साथ बैठक में एक प्रस्ताव स्वीकृत किया गया।

स्टालिन ने पत्रकारों से कहा, ‘‘हमने इस संबंध में दो रिपीट दो फरवरी से आठ फरवरी तक व्यापक हस्ताक्षर अभियान चलाने का फैसला किया है।’’

उन्होंने कहा कि इन हस्ताक्षरों को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सौंपने का फैसला किया गया है।

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