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चंद्रयान के चांद तक पहुंचने के पहले इसरो ने की मजाकिया टिप्पणी

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

चंद्रमा की सतह पर शनिवार तड़के बेहद जटिल मानी जा रही माड्यूल ‘विक्रम’ की लैंडिंग से पहले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर प्रज्ञान को लेकर चंद्रयान-दो के संबंधों को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश करते हुए ट्विटर पर कुछ कार्टून साझा किए हैं।

इसरो ने एक ‘‘कॉमिक स्ट्रिप’’ के साथ ट्वीट किया। इसमें ऑर्बिटर ने लैंडर ‘विक्रम’ से कहा कि दो सितंबर को अलग होने के पहले उसके साथ रहने में मजा आया। ऑर्बिटर ने लैंडर से कहा, ‘‘विक्रम, आपके साथ अब तक का सफर बहुत अच्छा रहा।’’

इस पर विक्रम ने भी उसी समान उत्साह से कहा, ‘‘वास्तव में काफी अच्छी यात्रा रही। मैं तुमसे ऑर्बिट में मिलूंगा।’’ इसके बाद ऑर्बिटर ने ‘विक्रम’ को आगे के सफर के लिए शुभकामनाएं दी।

इसरो ने भी दोनों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि वह ‘विक्रम’ और ‘प्रज्ञान’ के संपर्क में रहेगा।

सफल ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ भारत को रूस, अमेरिका और चीन के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बना देगी। इसके साथ ही भारत अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय लिखते हुए चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पहुंचने वाला विश्व का प्रथम देश बन जाएगा।

सिवन ने हाल में कहा था कि प्रस्तावित ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ दिलों की धड़कन थाम देने वाली साबित होने जा रही है क्योंकि इसरो ने ऐसा पहले कभी नहीं किया है।

गौरतलब है कि ‘चंद्रयान-2’ का प्रक्षेपण तकनीकी खामी के चलते 15 जुलाई को टाल दिया गया था। इसके बाद 22 जुलाई को इसके प्रक्षेपण की तारीख पुनर्निर्धारित करते हुए इसरो ने कहा था कि ‘चंद्रयान-2’ अनगिनत सपनों को चांद पर ले जाने के लिए तैयार है।

इसरो ने अपने सबसे शक्तिशाली प्रक्षेपण यान जीएसएलवी मार्क-।।। एम 1 के जरिए 3,840 किलोग्राम वजनी ‘चंद्रयान-2’ को प्रक्षेपित किया था। इस योजना पर 978 करोड़ रुपये की लागत आई है।

‘चंद्रयान-2’ ने धरती की कक्षा छोड़कर चंद्रमा की तरफ अपनी यात्रा 14 अगस्त को शुरू की थी। इसके बाद 20 अगस्त को यह चंद्रमा की कक्षा में पहुंच गया था।

इसरो ने बताया कि यहां स्थित इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) में मिशन ऑपरेशन कॉम्प्लेक्स से ‘ऑर्बिटर’ और ‘लैंडर’ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इस काम में ब्याललु स्थित इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (आईडीएसएन) की मदद ली जा रही है।

‘चंद्रयान-2’ के ‘ऑर्बिटर’ में आठ वैज्ञानिक उपकरण हैं जो चंद्रमा की सतह का मानचित्रण करेंगे और पृथ्वी के प्राकृतिक उपग्रह के बाह्य परिमंडल का अध्ययन करेंगे। ‘लैंडर’ के साथ तीन उपकरण हैं जो चांद की सतह और उप सतह पर वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे। वहीं, ‘रोवर’ के साथ दो उपकरण हैं जो चंद्रमा की सतह के बारे में जानकारी जुटाएंगे।

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