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CRPF में 21 साल तक सेवा देने वाले CMO डॉ मोहम्मद लतीफ ने देश को बताया अनुभव

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

पूरा हिंदुस्तान आज बड़े ही हर्षोल्लास के साथ देश का सबसे बड़ा पर्व गणतंत्र दिवस मना रहा है. देश के जांबाजों की गौरवगाथा सुनकर हर कोई गदगद हो जाता है. देशभर में आज 70 वें गणतंत्र दिवस की धूम है. इस मौके पर रिपब्लिक भारत आपको देश के रियल हीरो से रुबरु करवा रहा है. 

प्राउड टू इंडियन के जरिए रिपब्लिक टीवी देश के असली हीरो का सम्मान कर रहा है. इसी क्रम में आज हमने सीआरपीएफ सीएमओ डॉ. मोहम्मद लतीफ से खास मुलाकात की. मो. लतीफ वो शख्स हैं जिन्होंने अपने जीवन के 21 साल राष्ट्र को समर्पित किया है. 

सीआरपीएफ के साथ अपनी सेवा के 21 सालों में डॉ. मोहम्मद लतीफ ने गहन नक्सली क्षेत्र में काम किया. छत्तीसगढ़ और असम में उन्होंने अपनी भूमिका का निर्वहन किया. 

सीआरपीएफ के सीएमओ डॉ मोहम्मद लतीफ ने बताया कि जब मैं 1997 में सीआरपीएफ में शामिल हुआ, तो मेरी जान को खतरा था. उन्होंने कहा,  ''मैं वर्दी पहनने के लिए बहुत उत्सुक था. मैं अपनी इच्छा से इस बल (CRPF) में शामिल हुआ. मुझे हमारे जवानों, सैनिकों की मदद करने में खुशी होती है. वे सामने से लड़ रहे हैं, और हम उनकी देखभाल कर रहे हैं''

अपने स्टेथोस्कोप के साथ 52 साल के इस सैनिक ने जम्मू और कश्मीर के दुर्गम क्षेत्रों से लेकर नक्सल क्षेत्र तक अपनी सेवा दी. जिसमें छत्तीसगढ़ और असम भी शामिल है.

उन्होंने बताया कि "मुझे अमरनाथ यात्रा ड्यूटी में पांच बार, बालटाल के साथ-साथ पहलगाम में भी तैनात किया गया था. मैं 1 मार्च, 2000 को भी वहां था. जब भारी गोलीबारी हुई थी, मैं वहीं मौजूद था. मुझे छत्तीसगढ़ में हुई घटना का अनुभव था. हमारे जवान नक्सलियों से लड़ रहे थे और उनमें से पांच गंभीर रूप से घायल थे. भारी गोलीबारी हुई थी, मैं भी अंदर था. मैं गोली से इसलिए बच गया क्योंकि मैं अपने मरीज का इलाज कर रहा था. लेकिन हमने अपने सभी प्रयासों में लगा दिया." 

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