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पश्चिम बंगाल में हालात आपातकाल से कम नहीं : प्रकाश जावडेकर

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने मंगलवार को कहा कि ममता बनर्जी के शासन में पश्चिम बंगाल में आपातकाल जैसी स्थिति है। उन्होंने कहा कि भाजपा लोकतंत्र में विश्वास रखती है और इसकी रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

इससे पहले दिन में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भगवा पार्टी पर हमला करते हुए कहा कि 1975 में देश में आपातकाल लगाया गया था लेकिन पिछले पांच साल में देश ‘सुपर इमरजेंसी’ से गुजर रहा है । 

संसद के बाहर संवाददाताओं से बात करते हुए जावडेकर ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में ममता जो चीजें कर रही हैं, वह आपातकाल की स्थिति से कम नहीं है। वह बिल्कुल गलत तरीके से राज्य को चला रही हैं।’’ 

केंद्रीय पर्यावरण और सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी और सरकार लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और पश्चिम बंगाल के लिए उसी तरह लड़ेगी जिस तरह उनकी पार्टी ने 1975 में किया था । 

उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह से हिंसा को बढ़ावा दिया जा रहा है, वह लोकतंत्र के खिलाफ है। भाजपा और यह सरकार लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और सबका साथ, सबका विकास में भरोसा रखती है।’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘हमने 1975 में देश को बचाया था और अब हम पश्चिम बंगाल में भी मुकाबला करेंगे।’’ 

वहीं लोकसभा सदस्य एस एस अहलुवालिया के नेतृत्व वाले भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को पार्टी प्रमुख और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पश्चिम बंगाल के भाटपाड़ा इलाके में हिंसा पर अपनी रिपोर्ट सौंपी और आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस भेदभावपूर्ण तरीके से काम कर रही है । 

दल में सांसद सत्यपाल सिंह और बी डी राम भी थे । दोनों सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी हैं। यह दल शनिवार को भाटपाड़ा गया था । 

उत्तरी 24 परगना जिले के इस शहर में बृहस्पतिवार को झड़पों में दो लोगों की मौत हो गयी थी और 11 अन्य घायल हो गए थे । 

शाह को रिपोर्ट सौंपने के बाद अहलुवालिया ने अलग-अलग समुदायों से जुड़े दो समूहों के बीच हिंसा के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। 

अहलुवालिया ने यहां संवाददाताओं को बताया, ‘‘वहां लोग अपना काम नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि पुलिस में उनका भरोसा खत्म हो गया। पुलिस मूकदर्शक बनी रहती है या भेदभावपूर्ण रवैया अपनाती है।’’ 

उन्होंने कहा कि पुलिस ने प्रतिनिधिमंडल को इलाके में जाने से रोकने की कोशिश की और धारा 144 लागू होने के कारण उन्हें हवाईअड्डे पर रोक दिया। 

अहलुवालिया ने कहा कि रिपोर्ट में उन्होंने हिंसा प्रभावितों को वित्तीय मदद और उनके बच्चों को शिक्षा प्रदान किया जाना सुनिश्चित करने को कहा है । 

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