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सिलेबस विवाद पर SGPC का धरना, कहा- 'सिखों से माफी मांगे CM अमरिंदर'

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

पंजाब में सिलेबस विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड (पीएसईबी) की इतिहास की किताबों को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को कटघरे में खड़ा कर दिया है. इस विरोध के दौरान SGPC ने कहा है कि सीएम अमरिंदर माफी मांगे.

न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत के दौरान एसजीपीसी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने कहा, "उन्होंने जो समिति बनाई है वो अपना काम नहीं कर रही है, छात्रों को जो पाठ पढ़ाया जा रहा है उससे हमारे गुरुओं का अपमान होता है. इस वजह से, राज्यभर में सिख गुस्से में हैं, हम मांग करते हैं कि सरकार उन लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करे, जिन्होंने सिखों के इतिहास के साथ खिलवाड़ किया है."

इसके साथ ही उन्होंने कहा, 'पंजाब के मुख्यमंत्री को पूरे सिख समुदाय से माफी मांगनी चाहिए, इस मामले के बाद ये भी पता चलता है कि पंजाब के शिक्षा मंत्री को सिखों के महान इतिहास की जानकारी नहीं है, कैप्टन साहब को शिक्षा मंत्री को अपने कैबिनेट से हटा देना चाहिए.'

वहीं शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) ने पहले राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि पीएसईबी की 10+2 इतिहास के किताबों में सिख धर्म के गुरुओं का जानबूझकर अपमान किया गया है.

बता दें, मुख्यमंत्री ने 29 अक्टूबर को पीएसईबी को मौजूदा इतिहास पाठ्यपुस्तकों तब तक जारी रखने का निर्देश दिया जब तक कि विशेषज्ञ समूह समीक्षा प्रक्रिया पूरी नहीं कर लेता. सीएम अमरिंदर ने कहा है कि बच्चों को सिखाया गया इतिहास तथ्यात्मक रूप से सही होना चाहिए.

इसी बीच लोक कल्याण इंसाफ वेलफेयर सोसायटी के प्रधान और दल खालसा नेता बलदेव सिंह सिरसा ने पंजाब सरकार की तरफ से प्रकाशित इतिहास की किताबों को लेकर हुए धरने को नाटक करार दिया है. बलदेव सिंह ने कहा है कि ये सब शिरोमणि अकाली दल की बौखलाहट का नतीजा है. 

गौरतलब है कि गुरु साहिब और सिख इतिहास को लेकर पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड (पीएसईबी) की इतिहास की किताबों में प्रयोग किए गए गलत शब्दों के खिलाफ अकाली दल ने पंजाब सरकार के खिलाफ 48 घंटे के लिए आंदोलन की शुरू किया था.

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