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अपनी चाय में कहानियां और उपन्यास उबलाने वाले लक्ष्मण राव की कहानी, उन्हीं की जुबानी

Written By Amit Bajpayee | Mumbai | Published:

देशभर में आज 70 वें गणतंत्र दिवस की धूम है. 26 जनवरी एक ऐसा दिन है जो देश का राष्ट्रीय पर्व है. इस मौके पर रिपब्लिक भारत आपको देश के रियल हीरो से रुबरु करवा रहा है. इसी क्रम में आज हम आपको उस शख्स से मिलवाने जा रहे हैं जो चाय बेचते हुए 12 पुस्तकें लिख चुके हैं. जिन्में से एक किताब के लिए उन्हें पुरस्कार भी मिल चुका है. 

रिपब्लिक टीवी द्वारा आयोजित 'देश के रियल हीरो' प्रोग्राम में शामिल हुए 62 साल के लक्ष्मण राव को किताबों का बहुत शौक है. उनकी किताबों में ग्राहकों और उनके आसपास से जुड़े लोगों की कहानियां शामिल हैं. इनका एक फेसबुक पेज भी है और इनकी किताबें अमेजन और फिल्पकार्ट पर बेची जाती है. यहीं इनकी किताबे अंग्रेजी में अनुवाद हो रहा है जिसे किंडल पर बढ़ी जा सकता है. 

रिपब्लिक टीवी से बात करते हुए राव बतातें है कि महाराष्ट्र के अमरावती जिले से दिल्ली तक का सफर इतना आसान नहीं रहा. उन्होंने  खोके से लेकर ठेकेदार के पास भी म काम किया . लेकिन लंबे समय से वह चाय की दुकान चला रहे है. दिल्ली के आईडीओ इलाके में सड़क के किनारे उनकी एक छोटी से स्टॉल है. जहां चाय के साथ - साथ कुछ राय शुमारी भी हो जाती है. 

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बाद में राव की किताब 'रामदास' ने 2003 में इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती अवार्ड जीता और पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने उन्हें राष्ट्रपति भवन आने का न्यौता भी दिया. इसके बाद तो राव ने पीछे मुड़कर नहीं देखा.  उन्होंने पाई पाई बचाकर 7 हज़ार रुपए जमा किए ताकि वह अपनी पहली किताब खुद छाप सकें. इसके बाद उन्होंने साइकल से स्कूलों में जाकर उन लोगों के बीच अपनी किताब को बेचा जिन्हें हिंदी साहित्य में बहुत दिलचस्पी है.

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