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सबरीमाला मुद्दे को लेकर केरल में हड़ताल, पुलिस ने किए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

सबरीमला पहाड़ी पर स्थित अयप्पा स्वामी मंदिर में रजस्वला आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दिए जाने के विरोध में विभिन्न हिन्दू संगठनों की ओर से केरल में आहूत बंद बृहस्पतिवार की सुबह शुरू हुआ.  बंद के कारण बसें और ऑटोरिक्शा सड़कों से नदारद रहे.

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पत्तनमतिट्टा जिले में स्थित सबरीमला पहाड़ी पर जाने के तीनों मुख्य रास्तों पम्बा, निलक्कल और एरूमेली सहित विभिन्न जगहों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.

उन्होंने बताया कि राज्य के कुछ हिस्सों से केरल राज्य परिवहन निगम की बसों पर पथराव की सूचना है . हालांकि कुछ क्षेत्रों में निजी वाहन चल रहे हैं .

पुलिस ने प्रदर्शनों और हिंसा पर लगाम लगाने के लिए पम्बा और शनिधानम सहित चार जगहों पर सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है.

श्रद्धालुओं के एक संगठन सबरीमला संरक्षण समिति ने निलक्कल में अयप्पा स्वामी के भक्तों पर बुधवार को हुए पुलिस लाठीचार्ज के खिलाफ हड़ताल का आह्वान किया है. भाजपा और राजग सहयोगियों ने हड़ताल का समर्थन किया है .

कांग्रेस का कहना है कि वह हड़ताल में शामिल नहीं होगी लेकिन बृहस्पतिवार को पूरे प्रदेश में प्रदर्शनों का आयोजन करेगी .

प्रदर्शनकारी 28 सितंबर को आए शीर्ष अदालत के फैसले का विरोध कर रहे हैं . फैसले में रजस्वला आयु वर्ग की महिलाओं को भी मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई है .

अदालती फैसले के विरोध में प्रदर्शन कर रहे श्रद्धालुओं के साथ बुधवार को निलक्कल में झड़प होने के बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था .

प्रवीण तोगड़िया के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय हिन्दू परिषद ने शीर्ष अदालत के फैसले को निरस्त करने के लिए केरल की माकपा नीत एलडीएफ सरकार से कानून बनाने की मांग करते हुए हड़ताल का आह्वान किया है.

इस सब के बीच भी महिलाएं बुधवार को सीढ़ियों तक पहुंच गई थीं. अब गुरुवार को सीढ़ियों से भी आगे जाने की कोशिश हो रही है. गुरुवार को न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्टर सुहासनी राज पंबा  पहाड़ियों से होते हुए मंदिर की तरफ पहुंचने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन उन्हें वहीं से लौटा दिया गया. 

बुधवार को भी सुहासनी मंदिर की तरफ जाने की कोशिश कर रही थीं,  लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उन्हें वहीं रोक दिया था. अब आज वह कड़ी सुरक्षा के बीच पहाड़ी के रास्ते से मंदिर जा रही थीं. लेकिन उन्हें वापस जाने को कह दिया गया, वह खुद भी मान गई. उन्होंने कहा कि वह यहां पर कोई मुसीबत नहीं खड़ी करना चाहती हैं. 

( इनपुट - भाषा से भी )