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सबरीमाला प्रवेश: केरल सरकार के खिलाफ हिंदूवादी संगठन सड़कों पर उतरे

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

केरल में सबरीमाला के भगवान अय्यप्पा मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले उच्चतम न्यायालय के आदेश को लागू करने के राज्य की एलडीएफ सरकार के फैसले के खिलाफ हिन्दूवादी संगठन बुधवार को सड़कों पर उतर आए। संगठनों ने विरोध जताने के लिए रैलियां व मार्च निकाले और सड़कों को अवरूद्ध किया. वहीं सरकार इस बात पर कायम है कि वह शीर्ष न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करेगी.

विभिन्न स्थानों पर बड़ी संख्या में महिलाओं समेत श्रद्धालुओं ने सड़कों पर उतर प्रदर्शन किया. इस दौरान ‘सबरीमाला में भगवान अय्यप्पा मंदिर की पंरपरा की रक्षा करो’ के नारे लगाए. एर्नाकुलम जिले के अलुवा और मुवातुपुझा में प्रदर्शनकारियों और आम लोगों के बीच मामूली झड़प की भी खबर है.

भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं ने यहां पास में काझकूटम में केरल के दवासम मंत्री के. सुरेंद्रन को काले झंडे दिखाए जिससे कुछ समय के लिए यहां तनाव उत्पन्न हो गया. भाजपा नीत राजग की एक विरोध रैली पथानमथिट्टा के पंडालम से शुरू हुई और 15 अक्टूबर को सचिवालय के सामने खत्म होगी और इसके साथ प्रदर्शन किया जाएगा.

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पीएस श्रीधरन पिल्लई और भारत धर्म जन सेना (बीडीजेएस) के अध्यक्ष टी वेल्लापल्ली ने मार्च का नेतृत्व किया. पिल्लई ने कहा कि पार्टी श्रद्धालुओं के साथ है और आरोप लगाया कि सरकार पर्वतीय मंदिर को नष्ट करने की कोशिश कर रही है.

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राज्य की राजधानी में नायर सर्विस सोसाइटी के तत्वाधान में एक बड़ी रैली निकाली गई. इस बीच, भगवान अय्यप्पा मंदिर का प्रबंध संभालने वाले त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड की दो दिवसीय बैठक शुरू हुई जो 17 नवंबर से शुरू हो रहे मंडला-मक्करविल्लूकू उत्सव की तैयारियों की समीक्षा करेगा.

सुरेंद्रन ने कहा कि सरकार सबरीमाला आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करेगी. उन्होंने कहा कि सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि यह सिर्फ उच्चतम न्यायालय का आदेश लागू कर रही है. कांग्रेस भाजपा और विभिन्न हिन्दुवादी संगठनों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किए हैं. उनकी मांग है कि सरकार शीर्ष अदालत के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करे.

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