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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी के सामने पेश हुए राबर्ट वाड्रा, फिर होगी पूछताछ

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:


कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के जीजा और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा इस वक्त प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रडार पर हैं। अलग-अलग मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक के बाद एक पूछताछ का सिलसिला बदस्तूर जारी है। इसी क्रम में आज बुधवार को रॉबर्ट वाड्रा से करीब 3 घंटे पूछचाछ हूई। वाड्रा स्वास्थ्य कारणों की वजह से मंगलवार को पेश नहीं हुए थे। प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में इस महीने के शुरुआत से वाड्रा से तीन दिन के दौरान 23 घंटे तक पूछताछ की थी । दिल्ली की एक अदालत ने रॉबर्ट वाड्रा को केंद्रीय जांच एजेंसी के जांच में सहयोग करने के लिए कहा था । वाड्रा को शुक्रवार को सुबह 10:30 बजे फिर से निदेशालय के अधिकारियों के समक्ष हाजिर होने के लिए कहा गया है।

बता दें, कि वाड्रा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय का केस लंदन में संपत्ति खरीद में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है । उनपर लदंन के ब्रायन स्टन स्क्वॉयर में संपत्ति खरीदने का आरोप है । एजेंसी ने आदालत को बताया था कि उसे लंदन में कई जगह संपत्तियों की जनकारी मिली है , जिनका वास्ता वाड्रा से है। इनमें से दो घर भी शामिल हैं, एक घर की कीमत लगभग पांच मिलियन पाउंड और दूसरे घर की कीमत लगभग चार  मिलियन पाउंड आंका गया है। इसके अलावा छह अन्य फ्लैट और अन्य संपत्तियां हैं ।  

वाड्रा ने विदेशों में अवैध ढंग से संपत्तियां हासिल करने के आरोपों से इंनकार करते हुए इसे उनके खिलाफ साजिश करार दिया है । जानकारी के अनुसार ईडी वाड्रा से मनी लॉन्ड्रिंग के ऐसे ही एक अन्य मामले में दो बार जयपुर में पूछताछ कर चुका है ।

इससे पहले रिपब्लिक भारत की टीम ने इसी महिने 10 फरवरी को  राबर्ट वाड्रा को लेकर एक बहुत बड़ा खुलासा किया। इस खुलासे में यह साफ हो गया था कि कैसे कांग्रेस सरकार की मदद से राजस्थान में रॉबर्ट वाड्रा ने गरीबों की जमीन हड़पी । 


कैसे मिली ज़मीन ?

हम आज आपको बताएंगे कैसे रॉबर्ट वाड्रा ने गरीबों की जमीन हड़प ली और उन्हें बेघर कर दिया। इसे समझने के लिए जब रिपब्किल भारत की टीम राजस्थान के बीकानेर पहुंची । 

वहां से पता चला की पहले इस जमीन को एक मृत व्यक्ति नत्थाराम के नाम पर आवंटित की गई । उसके बाद एक फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी बनाया गया। जिसमें दिखाया गया कि नत्थाराम ने पावर ऑफ अटॉर्नी गुंगगर को दी । फिर गुंगगर ने जमीन राजेंद्र स्वामी को ट्रांसफर की। राजेंद्र ने वाड्रा के क़रीबी महेश नागर के ड्राइवर अशोक कुमार के नाम पर जमीन ट्रांसफ़र कर दी । इसके बाद अशोक ने 30 लाख रुपये के लिए यह जमीन रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी को ट्रांसफ़र कर दी । इसका मतलब साफ है कि रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी को मुनाफा और गरीबों को घाटा । 

 

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