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स्टिंग ऑपरेशन में बड़ा खुलासा- रईसजादे को बचाने में जुटी पुलिस, जिसकी रफ्तार के कहर ने ले ली थी CRPF जवान की जान

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

दिल्ली का सबसे पॉ़श इलाका ग्रेटर कैलाश में सड़क हादसा मामले में आज रिपब्लिक भारत बड़ा खुलासा करने जा रहा है। आपको बता दे कि 18 जुलाई को एक मर्सिडीज ने कार को जोरदार टक्कर मारी और इस हादसे में एक सीआरपीएफ जवान की जान चली गई ।

दरअसल, ग्रेटर कैलाश में सड़क हादसे में सीआरपीएफ जवान की मौत मामले में रिपब्लिक भारत के हाथ बड़े सबूत लगे हैं। रिपब्लिक भारत  के स्टिंग ऑपरेशन में चश्मदीद ने बड़ा खुलासा किया है। दिल्ली पुलिस रसूखदार आरोपी को बचाने की कोशिश कर रही है। दिल्ली पुलिस की जांच में कई खामियां रिपब्लिक भारत के हाथ लगी हैं जिसमें साफ हो रहा है कि दिल्ली पुलिस झूठ बोल रही है । 


एक चश्मदीद ने बताया कि हादसे के बाद मर्सिडीज में सवार शख्स पुलिस के सामने से फरार हो गया लेकिन पुलिस ने रोकने की जरा भी कोशिश नहीं की । मर्सिडीज कार डिवाइडर पर चढ़ चुकी थी । चश्मदीद ने बताया कि घटना के बाद टायर ऊपर हो चुका था ..कार पलट चुके थे...हम सब मिलकर गाड़ी उठाए और फिर पुलिसवालों ने घायलों को अस्पताल लेकर गए...पुलिस वाले घायलों को निकालकर ले गए. वो लड़का खुद ही होप लेस हो चुका था...उसकी गाड़ी भी टोटल लॉस थी...लड़का निकला फिर अपने दोस्त को फोन किया उसका दोस्त आया.. नई नई गाड़ी लेकर आया जगवार सीरीज की गाड़ी थी...रात के टाइम लेकर आया...काफी अच्छी गाड़ी थी...उसका दोस्ता 15 मिनट में आ गया होगा...चंडीगढ़ की गाड़ी थी...जगवार की किस सीरीज की गाड़ी थी ये नहीं पता...चंडीगढ़ का नंबर था लड़का 15 मिनट में ग्रेटर कैलाश से आया । उसके गाड़ी से पर्स और बाकी का सामान निकाला..पुलिसवाले ने बोला की थोड़ी देर रुक जा ...लेकिन 2 से 3 मिनट में गाड़ी में बैठा और निकल गए । लड़के को पुलिसवाले ने रोका नहीं । 

एक दुसरे चश्मदीद ने कहा कि पुलिस कह रही है कि आरोपी लड़के का मेडिकल किया गया लेकिन चश्मदीद के मुताबिक बिना मेडिकल के आरोपी वहां से फरार हो गया । मुझ नहीं लगता कि उस लड़के का मेडिकल किया होगा । उसका दोस्त आया और थोड़ी ही देर में वो निकल गया । 

तीसरे चश्मदीद ने बताया कि हमारे स्टिंग ऑपरेशन में पुलिस अधिकारी कह रहे हैं सीसीटीवी खराब है लेकिन सीसीटीवी में मर्सिडीज की तेज रफ्तार साफ देखी जा सकती है । आरोपी की तस्वीर भी साझा करने से  पुलिस बचती नजर आई

रिपोर्टर : उस गाड़ी में कोई और था क्या 
पुलिस : कोई नहीं था 
रिपोर्टर : इस केस में लॉयर कौन है...लड़के का लॉयर कौन है 
पुलिस : आरोपी के पास लॉयर है । 
रिपोर्टर : आरोपी की फोटो

पुलिस :  आरोपी की तस्वीर नहीं मिलेगी...हमने लिया ही नहीं है जरूरत क्या है । सारे दस्तावेज जांच किए हैं फिर फोटो क्यों लेंगे । 
रिपोर्टर: CRPF वालों को स्पॉट से अस्पताल कौन लेकर गया 
पुलिस :  मैं पीसीआर में लेकर गया 
रिपोर्टर: वहां एक सीसीटीवी है 
पुलिस :  सीसीटीवी चलता नहीं है । काफी पहले से है...चलता नहीं है । 
रिपोर्टर: आरोपी कहां है 

पुलिस :  अपने घर पर होगा 

बता दें हमारे स्टिंग ऑपरेशन में पुलिस आरोपी को बचाती नजर आई। पुलिस का कहना है कि हादसा है किसी से भी हो सकता है।

रिपोर्टर : किसकी गलती है 
पुलिस : इस बारे में हम कुछ नहीं कह सकते...जांच का विषय है 
रिपोर्टर: जांच में क्या आया है अगर आप कुछ शेयर करना चाहे...कुछ भी ऑफिशियल नहीं होगा 
पुलिस: आप देख ही रहे हैं...कैसा एक्सीडेंट हुआ है..

रिपोर्टर: किसकी गलती लगी आपको 
पुलिस: गलती क्या...तुम देख तो रहे हो...जानबूझकर तो कोई करता नहीं है । हो गई है...बस हो गई 
रिपोर्टर: रेड लाइट किसने जंप किया । 

पुलिस: हम बता नहीं सकते । हम नहीं बता सकते ...जांच का विषय है

R.भारत के सवाल 

पुलिस ने आरोपी का फोटो क्यों नहीं लिया ?
CCTV काम क्यों नहीं कर रहा था ?
पुलिस आरोपी को क्लीन चिट क्यों दे रही है ?
पुलिस को आरोपी के ठिकाने का पता क्यों नहीं ?
क्या पुलिस ने आरोपी का मेडिकल कराया ?

बता दें  ये पूरी घटना 18 जुलाई को तकरीबन रात 11 बजे ग्रेटर कैलाश में हुई । रिपब्लिक भारत के खुलासे में बड़़ा सवाल यहीं है कि पुलिस आरोपी को बचाने में क्यों जुटी है । रिपब्लिक भारत को मिली जानकारी के मुताबिक आरोपी का मेडिकल कराया ही नहीं गया । एम्स ट्रॉमा सेंटर के रजिस्टर में सानिध्य गर्ग का नाम नहीं मिला ।   लेकिन दिल्ली पुलिस ने रिपब्लिक भारत को बताया कि आरोपी सानिध्य गर्ग को मेडिकल के लिए लाया गया था..जाहिर है दिल्ली पुलिस झूठ बोल रही है । 

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