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‘बाल पोर्नोग्राफ़ी’ के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों को एकजुट करें प्रधानमंत्री : संसदीय समिति

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

इंटेरनेट के ज़रिए अश्लीलता ख़ासकर, सोशल मीडिया पर ‘चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी’ के व्यापक प्रसार की समस्या से निपटने के लिए राज्यसभा सदस्यों की एक समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी के खिलाफ भी विभिन्न देशों को ‘अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन’ की तर्ज़ पर एकजुट करने का सुझाव दिया है।

राज्यसभा में कांग्रेस के सदस्य जयराम रमेश की अध्यक्षता वाली उच्च सदन की तदर्थ समिति ने शनिवार को सभापति एम वेंकैया नायडू को सौंपी अपनी रिपोर्ट में यह सुझाव दिया है।

उपराष्ट्रपति कार्यालय ने ट्वीट कर बताया कि रमेश सहित समिति के अन्य सदस्यों ने सोशल मीडिया पर बाल पोर्नोग्राफ़ी के प्रसार, इससे बच्चों पर पड़ने वाले प्रभावों और इसे रोकने के उपाय से जुड़ी रिपोर्ट सभापति को सौंपी।

राज्यसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार समिति ने रिपोर्ट में कहा कि प्रधानमंत्री को बाल पोर्नोग्राफ़ी की समस्या पर संज्ञान लेते हुए अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी इस विषय को शामिल करना चाहिए और यह बताना चाहिए कि इससे निपटने के लिए क्या क्या उपाय किए जा सकते हैं।

समिति ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि जिस प्रकार से प्रधानमंत्री ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक पहल करते हुए अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का गठन किया है, वैसे ही बाल पोर्नोग्राफ़ी के संकट से निपटने के लिए भी उन्हें ‘वैश्विक राजनीतिक गठजोड़’ बनाने की पहल करनी चाहिए।

समिति ने सुझाव दिया है कि प्रधानमंत्री इस दिशा में जी-20 या संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में कारगर पहल कर सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि राज्यसभा के पिछले साल 250 वें सत्र के दौरान उच्च सदन में अन्नाद्रमुक की सदस्य एस विजिला सत्यनाथन ने इंटेरनेट, ख़ासकर सोशल मीडिया पर अश्लील सामग्री की बच्चों तक आसान पहुँच का मुद्दा उठाया था। इस पर समूचे सदन ने एक स्वर से गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सभापति के माध्यम से सरकार से इस संबंध में कारगर क़दम उठाने की माँग की थी।

सभापति ने इस समस्या से निपटने के उपाय सुझाने के लिए रमेश की अगुवाई में 14 सदस्यीय तदर्थ समिति का गठन कर एक महीने में रिपोर्ट देने के लिए कहा था।

समिति ने इस विषय पर तीन बैठकें कर विस्तार से चर्चा के बाद 40 सुझावों वाली इस रिपोर्ट में सिफ़ारिश की है कि सरकार को यौन अपराधों से बच्चों को बचाने वाले पोक्सो अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी क़ानून और भारतीय दंड संहिता में माक़ूल बदलाव करने की तत्काल पहल करनी चाहिए।

इसके साथ ही राज्य सरकारों को भी सिफ़ारिश की है कि वे राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को इस समस्या से निपटने के लिए सजगता से कार्रवाई करने में सक्षम बनायें।

समिति ने ट्विटर और फ़ेसबुक सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफ़ार्म तथा संबद्ध पक्षकारों से विचारविमर्श के बाद पोक्सो क़ानून में बाल पोर्नोग्राफ़ी की परिभाषा को व्यापक बनाने और इसकी आनलाइन निगरानी के तंत्र को मजबूत बनाने के लिए तकनीकी सुझाव भी दिए हैं।

इनमें भारत में उपलब्ध सभी संचार उपकरणों में ऐसे एप्लिकेशन को अनिवार्य बनाने के लिए कहा है जिसकी मदद से बच्चों तक अश्लील सामग्री की पहुँच पर अभिभावक सतत निगरानी रख सकें।

समिति ने आनलाइन फ़िल्म प्रसारण करने वाले नेटफ़्लिक्स और ट्विटर एवं फ़ेसबुक सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफ़ार्म को वयस्कों के लिए प्रसारित होने वाली सामग्री का अलग स्थान सुनिश्चित करने का सुझाव भी दिया है ताकि बच्चों को इसकी पहुँच से दूर रखा जा सके।

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