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PM मोदी को मिला UN का सर्वोच्च पर्यावरण पुरस्कार ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवार्ड’...

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

राजधानी दिल्ली में बुधवार को आयोजित एक विशेष समारोह में संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के सर्वोच्च पर्यावरण पुरस्कार ‘‘चैंपियंस ऑफ अर्थ द अवार्ड’’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सम्मानित किया गया. संयुक्त राष्ट्र  महासचिव गुटारेस ने पर्यावरण के क्षेत्र में भारत का योगदान देखते हुए पीएम मोदी को यह सम्मान दिया है.

इस मौके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘संयुक्त राष्ट्र चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवॉर्ड’ प्राप्त करने के बाद कहा कि यह पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भारत की सवा सौ करोड़ जनता की प्रतिबद्धता का सम्मान है. यह भारत की उस नित्य नूतन, चिर पुरातन परंपरा का सम्मान है, जिसने प्रकृति में परमात्मा को देखा और जिसने सृष्टि के मूल में पंचतत्व के अधिष्ठान का आह्वान किया है.

 

पढ़ें, उनके भाषण के मुख्य बातें...

  • "ये सम्मान पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भारत की सवा सौ करोड़ जनता की प्रतिबद्धता का है. चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवॉर्ड, भारत की उस नित्य नूतन चीर पुरातन परंपरा का सम्मान है, जिसने प्रकृति में परमात्मा को देखा है. जिसने सृष्टि के मूल में पंचतत्व के अधिष्ठान का आह्वान किया है."
  • "ये भारत के जंगलों में बसे आदिवासी भाई-बहनों का सम्मान है,जो अपने जीवन से ज्यादा जंगलों से प्यार करते हैं ये भारत के मछुआरों का सम्मान है, जो समंदर से उतना ही लेते हैं,जितना अर्थ उपार्जन के लिए आवश्यक होता है. ये भारत के किसानों का सम्मान है, जिनके लिए ऋतुचक्र ही जीवनचक्र है."
  • "ये भारत की उस महान नारी का सम्मान है, जिसके लिए सदियों से Reuse और Recycle रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा रहा है.  जो पौधे में भी परमात्मा का रूप देखती है. जो तुलसी की पत्तियां भी तोड़ती है, तो गिनकर. जो चींटी को भी अन्न देना पुण्य मानती है."
  • "Climate और Calamity का Culture से सीधा रिश्ता है. Climate की चिंता जब तक Culture का हिस्सा नहीं होती तब तक Calamity से बच पाना मुश्किल है. पर्यावरण के प्रति भारत की संवेदना को आज विश्व स्वीकार कर रहा है, लेकिन ये हज़ारों वर्षों से हमारी जीवन शैली का हिस्सा रहा हैये संवेदना है जो हमारे जीवन का हिस्सा है. पेड़-पौधों की पूजा करना, मौसम, ऋतुओं को व्रत और त्योहार के रूप में मनाना, लोरियों-लोकगाथाओं में प्रकृति से रिश्ते की बात करना, हमने प्रकृति को हमेशा सजीव माना है, सहजीव माना है."
  • "आबादी को पर्यावरण पर, प्रकृति पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना, विकास के अवसरों से जोड़ने के लिए सहारे की आवश्यकता है, हाथ थामने की ज़रूरत है. इसलिए मैं Climate Justice की बात करता हूं. Climate Change की चुनौती से Climate Justice सुनिश्चित किए बिना निपटा नहीं जा सकता."
  • "आज भारत दुनिया के उन देशों में है जहां सबसे तेज़ गति से शहरीकरण हो रहा है. ऐसे में अपने शहरी जीवन को Smart और Sustainable बनाने पर भी बल दिया जा रहा है. Infrastructure को Sustainable Environment and Inclusive Growth के लक्ष्य के साथ बनाया जा रहा हैं."
  • "देश के नेशनल हाईवे, एक्सप्रेसवे को इको फ्रेंडली बनाया जा रहा है, उनके साथ-साथ Green Corridor विकसित किया जा रहा है. मेट्रो जैसे सिटी ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को भी Solar Energy से जोड़ा जा रहा है. वहीं रेलवे की Fossil Fuel पर निर्भरता को हम तेज़ी से कम कर रहे हैं."
  • "आज भारत में घरों से लेकर गलियों तक, दफ्तरों से लेकर सड़कों तक, पोर्ट्स से लेकर और एयरपोर्ट्स तक, Water और Energy Conservation की मुहिम चल रही है. LED बल्ब से लेकर Rain Water Harvesting तक, हर स्तर पर टेक्नॉलॉजी को promote किया जा रहा है."
  • "इन सारे प्रयासों के बीच, अगर सबसे बड़ी सफलता हमें मिली है, तो वो है लोगों के behaviour, लोगों के thought process में बदलाव. पर्यावरण के प्रति लगाव हमारी आस्था के साथ-साथ अब आचरण में भी और मजबूत हो रहा है."
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