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देश के जांबाज़ सैनिकों को सलाम.. जानें ‘विजय दिवस’ की शौर्य गाथा

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

16 दिसंबर 1971... ये तारीख महज तारीख नहीं है. इस दिन को भारत में विजय दिवस के तौर पर मनाया जाता है. देश के जांबाज वीर सपूतों ने देश के नाम एक ऐसा जीत का सेहरा बांधा जिसे सदियों तक पूरी दुनिया याद रखेगी. इसी दिन साल 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारत ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी. युद्ध के अंत में पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के 93,000  सैनिकों ने भारत के सामने घुटने टेक दिए थे.  

साल 1971 के युद्ध में भारत ने पाकिस्‍तान को करारी शिकस्‍त दी थी. जिसके बाद पूर्वी पाकिस्तान आजाद हो गया. जो आज बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है. ये युद्ध भारत के लिए ऐतिहासिक और हर देशवासी के दिल में उत्साह भर देने वाला साबित हुआ.

पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी बलों के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एएके नियाजी ने भारत के पूर्वी सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था. जिसके बाद 17 दिसम्बर को 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों को युद्धबंदी बनाया गया. इस युद्ध में करीब 3,900 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे जबकि 9,851 घायल हो गए थे.

आज इस ऐतिहासिक विजय दिवस के मौके पर देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश के लिए कुर्बान हुए जांबाज सैनिकों को श्रद्धांजली दी. 

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस अवसर पर कहा, ''विजय दिवस के अवसर पर, 1971 के युद्ध में देश की और मानवीय स्वतंत्रता के सार्वभौमिक मूल्यों की रक्षा करने के लिए अपनी सशस्‍त्र सेनाओं को हम कृतज्ञता के साथ याद करते हैं। विशेषकर उस साहसिक अभियान में बलिदान हो गए सैनिकों के प्रति हम श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं''

इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, ''आज विजय दिवस के मौके पर हम 1971 के युद्ध में अदम्य साहस के साथ लड़े अपने बहादुर जवानों को याद करते हैं. उनके अटल पराक्रम और देशप्रेम ने देश सुरक्षित है ये सुनिश्चित किया.''

बता दें, 3 दिसंबर साल 1971 को इंदिरा गांधी तत्‍कालीन कलकत्ता में एक जनसभा को संबोधित कर रही थीं. इसी दिन शाम के वक्‍त पाकिस्तानी वायुसेना के विमानों ने भारतीय वायुसीमा को पार करके पठानकोट, श्रीनगर, अमृतसर, जोधपुर, आगरा आदि सैनिक हवाई अड्डों पर बम गिराना शुरू कर दिया. इंदिरा गांधी ने उसी वक्‍त दिल्ली लौटकर मंत्रिमंडल की आपात बैठक की.

युद्ध शुरू होने के बाद पूर्व में तेज़ी से आगे बढ़ते हुए भारतीय सेना ने जेसोर और खुलना पर कब्ज़ा कर लिया. इस युद्ध के दौरान एक बार फिर से इंदिरा गांधी का विराट व्‍यक्तित्‍व सामने आया. 14 दिसंबर को भारतीय सेना ने एक गुप्त संदेश को पकड़ा कि दोपहर ग्यारह बजे ढाका के गवर्नमेंट हाउस में एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है, जिसमें पाकिस्तानी प्रशासन बड़े अधिकारी भाग लेने वाले हैं. भारतीय सेना ने तय किया कि इसी समय उस भवन पर बम गिराए जाएं. बैठक के दौरान ही मिग 21 विमानों ने भवन पर बम गिरा कर मुख्य हॉल की छत उड़ा दी. जिसके बाद गवर्नर मलिक अपना इस्तीफ़ा लिखा.

16 दिसंबर को भारतीय सेना ने युद्ध पर पूरी तरह से अपनी पकड़ बना ली. शाम के साढ़े चार बजे जनरल अरोड़ा हेलिकॉप्टर से ढाका हवाई अड्डे पर उतरे. अरोडा और नियाज़ी एक मेज़ के सामने बैठे और दोनों ने आत्म-समर्पण के दस्तवेज़ पर हस्ताक्षर किए.

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