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PM मोदी ने 26/11 हमले पर कांग्रेस को घेरा, कहा- 'उस वक्त दिल्ली में रिमोट कंट्रोल से 'मैडम' का राज चलता था'

Written By Ayush Sinha | Mumbai | Published:

26 नवंबर 2008 की दर्दनाक दास्तां जो इतिहास के पन्नों पर सैकड़ों लोगों के खून से हमेशा-हमेशा के लिए दर्ज हो गई. उस काली रात के बारे सोच कर ही हर किसी के रौंगटे खड़े हो जाते हैं. देश के आर्थिक राजधानी मुंबई में आतंकियों ने बंदूक और गोलियों से तांडव मचा रखा था. आज देश के सबसे बड़े आतंकी हमले को 10 साल पूरे हो गए हैं. आज के ठीक 10 साल पहले हर कोई सहमा हुआ था. हर किसी को इस बात का खौफ था कि कहीं उनके भी अपने आतंकियों की चुंगल में तो नहीं फंसे होंगे.

इस बीच देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 साल पहले हुए मुंबई हमले को लेकर कांग्रेस को खूब खरी-खोटी सुनाई है. राजस्थान के भीलवाड़ा में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है.

इस दौरान पीएम ने कहा, 'आज 26 नवंबर है, जब दिल्ली में मैडम का राज चलता था. रिमोड कंट्रोल से चलता था. जब महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार थी. महाराष्ट्र में भी कांग्रेस की सरकार, दिल्ली में भी कांग्रेस की सरकार.. और ये 26/11 मुंबई में आतंकवादियों ने हमला करके हमारे अनेक देश के नागरिकों को देश के जवानों को आतंकवादियों ने गोलियों से भून दिया था.'

उन्होंने बोला, 'भाईयो बहनों उस आतंकवाद के भीषण घटना को आज 10 साल हो गए हैं. और मुझे बराबर याद है कि जब मुंबई में आतंकवाद की घटना घटी थी उस समय राजस्थान में चुनाव अभियान चल रहा था. अगर उस समय इस देश में से कोई भी उस आतंकवाद की घटना की आलोचना भी अगर करता था. निर्दोष लोगों को मार दिया इतना भी बोलता था तो ये रागदरबारी ऐसे उछल पड़ते थे-ऐसे उछल पड़ते थे कि बोलने वालों की मुह पर ताले लगा देते थे.'

PM मोदी ने कहा कि वो उस वक्त कहते थे ये तो युद्ध है युद्ध, पाकिस्तान ने हिंदुस्तान पर युद्ध बोला है और ये लोग राजनीति कर रहे हैं. इस समय दिल्ली सरकार के ओर उसके हाथ मजबूत करने चाहिए. आतंकवाद के नाम पर राजनीति नहीं करनी चाहिए ये बड़े बड़े उपदेश दे रहे थे. और उनके राग दरबारी बड़े गाजे बाजे के साथ कांग्रेस की लिखी कथा पढ़ते रहते थे. लिखते रहते थे, मैं उन राग दरबारियों ,से पूछना चाहता हूं. मैं उस कांग्रेस पार्टी को पूछना चहता हूं कि 10 साल पहले 26 नवंबर को आतंकवाद की इतनी भयंकर घटना घटी, सारी दुनिया हिल गई थी और कांग्रेस उसमें से चुनाव जीतने के खेल खेल रही थी.

'वही कांग्रेस उस समय देश भक्ति के पाठ पढ़ाती थी लेकिन जब मेरे देश की सेना ने पाकिस्तान को उसके घर में जाकर सर्जिकल स्ट्राइक किया, आतंकवादियों का हिसाब चुकता कर दिया. और एक अखबार ने तो लिखा था वहां के नागरिकों को पूछ कर उसने लिखा था कि ट्रकें भर-भर कर लाशें ले जानी पड़ रही है. जब देश की सेना ने इतना बड़ा पराक्रम किया. दुश्मन को जाकर उसके घर में मारा हर हिंदुस्तानी को गर्व हुआ था कि नहीं हुआ था? ये देश भक्ति की मिसाल थी कि नहीं... ये वीरता की मिसाल थी कि नहीं? ये शौर्य पराक्रम की गाथा थी कि नहीं, लेकिन आज के समय कांग्रेस ने सवाल उठाया. वीडियो दिखाओ वीडियो सर्जिकल स्ट्राइक हुआ कि नहीं हुआ. क्या देश का सेना का जवान मौत को मुट्थी में लेकर निकलता है क्या हाथ में कैमरा लेकर जाएगा क्या ? 

PM मोदी ने पूछा कि उस समय उनको देश भक्ति याद नहीं आई लेकिन 26/11 को ये राग दरबारी कांग्रेसियों से भी ज्यादा उछल-उछल के गीत गाते थे. आज दस साल के बाद उनको जवाब देंगे.

गौरतलब है कि 26 नवंबर 2008 को पाकिस्तान से समुद्र मार्ग से आए 10 आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी कर 18 सुरक्षाकर्मियों समेत 166 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था और बड़ी संख्या में लोगों को घायल कर दिया था. उस हमले में आतंक निरोधी दस्ते (एटीएस) के तत्कालीन प्रमुख हेमंत करकरे, सेना के मेजर संदीप उन्नीकृष्णन, मुंबई के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अशोक कामटे और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विजय सालस्कर की भी मौत हो गई थी.

ये ऑपरेशन 26 से 29 नवंबर तक चला था. इसमें आतंकियों ने छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, ओबेरॉय ट्राइडेंट, ताज महल होटल, लियोपोल्ड कैफे, कामा अस्पताल और यहूदी सामुदायिक केंद्र नरीमन हाउस को खासतौर पर निशाना बनाया था. हमलावरों में से एक अजमल कसाब को जिंदा पकड़ लिया गया था. 21 नवंबर 2012 को उसे फांसी दे दी गई थी.

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