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प्रधानमंत्री ने स्थानीय भाषाओं के महत्व को रेखांकित किया, संरक्षण की जरूरत बतायी

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की संस्कृति एवं विविधता में स्थानीय भाषाओं एवं बोलियों के महत्व को रेखाकिंत करते हुए चिंता व्यक्त की कि इन भाषाओं के संरक्षण के स्थानीय प्रयासों के बावजूद कहीं ये भाषाएँ और बोलियाँ ख़त्म तो नहीं हो जाएंगी।

आकाशवाणी पर प्रसारित ‘‘मन की बात’’ कार्यक्रम में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमारी सभ्यता, संस्कृति और भाषाएं पूरे विश्व को विविधता में एकता का सन्देश देती हैं। 130 करोड़ भारतीयों का ये वो देश है, जहाँ कहा जाता था कि, ‘कोस-कोस पर पानी बदले और चार कोस पर वाणी।’ हमारी भारत भूमि पर सैकड़ों भाषाएँ सदियों से पुष्पित पल्लवित होती रही हैं।हालाँकि, हमें इस बात की भी चिंता होती है कि कहीं ये भाषाएँ और बोलियाँ ख़त्म तो नहीं हो जाएगी।’’ मोदी ने कहा कि पिछले दिनों, उन्हें उत्तराखंड के धारचूला की कहानी पढ़ने को मिली।उन्हें काफी संतोष मिला कि किस प्रकार लोग अपनी भाषाओँ को बढ़ावा देने के लिए आगे आ रहे हैं। कुछ लोग नवोन्मेष कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि धारचूला की खबर पर उनका ध्यान इसलिए भी गया कि किसी समय वह धारचूला में आते-जाते रुका करते थे। उस पार नेपाल, इस पार कालीगंगा - तो स्वाभाविक है धारचूला सुनते ही इस खबर पर उनका ध्यान गया।

मोदी ने कहा कि पिथौरागढ़ के धारचूला में, रंग समुदाय के काफ़ी लोग रहते हैं, इनकी, आपसी बोल-चाल की भाषा रगलो है। ये लोग इस बात को सोचकर अत्यंत दुखी हो जाते थे कि इनकी भाषा बोलने वाले लोग लगातार कम होते जा रहे हैं - फिर क्या था, एक दिन, इन सबने, अपनी भाषा को बचाने का संकल्प ले लिया। देखते-ही-देखते इस मिशन में रंग समुदाय के लोग जुटते चले गए।

उन्होंने कहा कि इस समुदाय के लोगों की संख्या गिनती भर की है। मोटा-मोटी अंदाज़ कर सकते हैं कि शायद दस हज़ार हो, लेकिन, रंग भाषा को बचाने के लिए हर कोई जुट गया, चाहे, चौरासी साल के बुज़ुर्ग दीवान सिंह हों या बाईस वर्ष की युवा वैशाली गर्ब्याल प्रोफेसर हों या व्यापारी, हर कोई,हर संभव कोशिश में लग गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस मिशन में, सोशल मिडिया का भी भरपूर प्रयोग किया गया। कई व्हाट्स एप ग्रुप बनाए गए। सैकड़ों लोगों को उसमें जोड़ा गया। इस भाषा की कोई लिपि नहीं है। सिर्फ, बोल-चाल में ही एक प्रकार से इसका चलन है। ऐसे में, लोग कहानियाँ, कवितायेँ और गाने पोस्ट करने लगे। एक-दूसरे की भाषा ठीक करने लगे।

मोदी ने कहा कि एक प्रकार से व्हाट्स एप ही कक्षा बन गया जहाँ हर कोई शिक्षक भी है और विद्यार्थी भी। रंगलोक भाषा को संरक्षित करने का एक इस प्रयास में है। तरह-तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, पत्रिका निकाली जा रही है और इसमें सामाजिक संस्थाओं की भी मदद मिल रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने 2019 को ‘अंतरराष्ट्रीय स्थानीय भाषा वर्ष’ घोषित किया है। यानी उन भाषाओँ को संरक्षित करने पर जोर दिया जा रहा है जो विलुप्त होने के कगार पर हैं।

उन्होंने इस संबंध में आधुनिक हिंदी के जनक, भारतेंदु हरिश्चंद्र और महाकवि सुब्रह्मण्यम भारती द्वारा तमिल में कही गई बातों का जिक्र भी किया ।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दो दिन बाद 26 नवम्बर है। यह दिन पूरे देश और गणतंत्र के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन को हम ‘संविधान दिवस’ के रूप में मनाते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार का ‘संविधान दिवस’ अपने आप में विशेष है, क्योंकि, इस बार संविधान को अपनाने के 70 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस बार इस अवसर पर संसद में विशेष आयोजन होगा और फिर साल भर पूरे देशभर में अलग-अलग कार्यक्रम होंगे।

मोदी ने कहा, ‘‘इस अवसर पर हम संविधान सभा के सभी सदस्यों को आदरपूर्वक नमन करें, अपनी श्रद्धा अर्पित करें। भारत का संविधान ऐसा है जो प्रत्येक नागरिक के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करता है और यह हमारे संविधान निर्माताओं की दूरदर्शिता की वजह से ही सुनिश्चित हो सका है। मैं कामना करता हूँ कि ‘संविधान दिवस’ हमारे संविधान के आदर्शों को कायम रखने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की हमारी प्रतिबद्धता को बल दे। आखिर ! यही सपना तो हमारे संविधान निर्माताओं ने देखा था।’’

बारामती के लोगों को भरोसा, राकांपा संकट का समाधान कर लेंगे शरद पवार
पुणे, 24 नवंबर (भाषा) महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए राकांपा नेता अजित पवार द्वारा भाजपा को समर्थन देने के बाद बने राजनीतिक हालात के मद्देनजर बारामती के लोगों को लगता है कि राकांपा प्रमुख शरद पवार अपनी पार्टी के मौजूदा संकट का समाधान कर लेंगे।
 

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