General News

प्रधानमंत्री इसरो केंद्र से ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा बनने के लिए बेंगलुरु पहुंचे

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार देर रात चंद्रयान-2 के लैंडर ‘विक्रम’ के चांद पर उतरने के ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए येलहांका एयरबेस पहुंचे।

प्रधानमंत्री एक विशेष विमान से यहां आए और उनका स्वागत करने के लिए राज्यपाल वैजुभाई वाला, मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा, केंद्रीय मंत्री डी वी सदानंद गौड़ा और प्रह्लाद जोशी और कर्नाटक के राजस्व मंत्री आर अशोक और राज्य के भाजपा प्रमुख नलीन कुमार कटिल पहुंचे।

प्रधानमंत्री मोदी ने दिन में ट्वीट किया था, ‘‘ मैं बेंगलुरु के इसरो केंद्र में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए बेहद उत्साहित हूं।’’ 

लैंडर ‘विक्रम’ शुक्रवार देर रात डेढ़ बजे से ढाई बजे के बीच चांद की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करेगा। ‘विक्रम’ के अंदर रोवर ‘प्रज्ञान’ है जो शनिवार सुबह साढ़े पांच से साढ़े छह बजे के बीच बाहर निकलेगा।

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास के इस अभूतपूर्व क्षण का गवाह बनने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बेंगलूर स्थित इसरो के केंद्र में मौजूद रहेंगे ।

प्रधानमंत्री मोदी, ऑनलाइन क्विज प्रतियोगिता के जरिए इसरो द्वारा देशभर से चुने गए दर्जनों छात्र-छात्राएं, बड़ी संख्या में मीडिया कर्मी और अन्य लोग इसरो टेलीमेंट्री ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) के जरिए यहां इस ऐतिहासिक लम्हे का सीधा नजारा देखेंगे।

बता दें चंद्रयान-2 मिशन के तहत विक्रम लैंडर के चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि यह अभियान श्रेष्ठ भारतीय प्रतिभा और तपस्या की भावना को परिलक्षित करता है ।

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘ इसकी सफलता से करोड़ों भारतीयों को लाभ होगा। ’’ 

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के सिवन ने पीटीआई से कहा, ‘‘हम इसका (लैंडिंग का) बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। सब कुछ योजना के मुताबिक हो रहा है।’’ 

लैंडर ‘विक्रम’ शुक्रवार देर रात डेढ़ बजे से ढाई बजे के बीच चांद की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करेगा। ‘विक्रम’ के अंदर रोवर ‘प्रज्ञान’ है जो शनिवार सुबह साढ़े पांच से साढ़े छह बजे के बीच बाहर निकलेगा।

सॉफ्ट लैंडिंग का दूरदर्शन पर शुक्रवार देर रात एक बजकर 10 मिनट से सीधा प्रसारण किया जाएगा। इसे इसरो की वेबसाइट, यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर भी प्रसारित किया जाएगा।

मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘ इस क्षण का 130 करोड़ भारतीय काफी उत्साह के साथ प्रतीक्षा कर रहे हैं । अब से कुछ घंटे बाद चंदयान-2 अपने आखिरी गंतव्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंच जायेगा । भारत और शेष दुनिया हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के शानदार प्रदर्शन को एक बार फिर देखेगी। ’’ भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास के इस अभूतपूर्व क्षण का गवाह बनने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बेंगलूर स्थित इसरो के केंद्र में मौजूद रहेंगे। 

इस मिशन से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, ‘‘निश्चित ही पूरी (चंद्रयान-2) टीम के मन में घबराहट है क्योंकि यह एक जटिल अभियान है और हम पहली बार ऐसा कर रहे हैं।’’ 

अधिकारी ने कहा, ‘‘सेंसरों, कम्प्यूटरों, कमांड प्रणालियों... सभी का अच्छी तरह काम करना आवश्यक है, लेकिन हमने जमीन पर कई आभासी परीक्षण किए हैं जिससे हमें यह भरोसा मिलता है कि सब सही होगा।’’ 

उन्होंने ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ को ‘‘बच्चे को पालने में रखने के समान बताया’’ और कहा ‘‘इसे लेकर थोड़ी घबराहट है लेकिन शंका नहीं है।’’ 

प्रधानमंत्री मोदी, ऑनलाइन क्विज प्रतियोगिता के जरिए इसरो द्वारा देशभर से चुने गए दर्जनों छात्र-छात्राएं, बड़ी संख्या में मीडिया कर्मी और अन्य लोग इसरो टेलीमेंट्री ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) के जरिए यहां इस ऐतिहासिक लम्हे का सीधा नजारा देखेंगे।

भारत जब चांद पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ की कोशिश करेगा तो सभी की नजरें लैंडर ‘विक्रम’ और रोवर ‘प्रज्ञान’ पर टिकी होंगी।

1,471 किलोग्राम वजनी लैंडर ‘विक्रम’ का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम ए साराभाई के नाम पर रखा गया है। इसे चांद पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने के लिए तैयार किया गया है। 

रोवर 27 किलोग्राम वजनी छह पहिया रोबोटिक वाहन है जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लैस है। इसका नाम ‘प्रज्ञान’ है जिसका मतलब ‘बुद्धिमत्ता’ से है। यह ‘लैंडिंग’ स्थल से 500 मीटर तक की दूरी तय कर सकता है और यह अपने परिचालन के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करेगा। 

इसरो के अनुसार, लैंडर में तीन वैज्ञानिक उपकरण लगे हैं जो चांद की सतह और उप सतह पर वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देंगे, जबकि रोवर के साथ दो वैज्ञानिक उपकरण हैं जो चांद की सतह से संबंधित समझ बढ़ाएंगे। 

सफल ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के साथ ही भारत रूस, अमेरिका और चीन के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। इसके साथ ही भारत अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय लिखते हुए चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पहुंचने वाला विश्व का प्रथम देश बन जाएगा।

सिवन ने हाल में कहा था ‘‘प्रस्तावित ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ दिलों की धड़कन थाम देने वाली स्थिति होगी क्योंकि इसरो ने ऐसा पहले कभी नहीं किया है।
 

DO NOT MISS