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PM मोदी ने भारत-प्रशांत क्षेत्र को साझा समृद्धि का क्षेत्र बनाने की वकालत की

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

 भारत ने रणनीतिक महत्व वाले हिन्द-प्रशांत क्षेत्र को साझा आर्थिक विकास का क्षेत्र बनाने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में चीन अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का प्रयास करता रहता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मालदीव की संसद को संबोधित किया। वह दूसरे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा पर शनिवार को यहां पहुंचे।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हिन्द-प्रशांत क्षेत्र हमारी जीवनरेखा और व्यापार तथा समृद्धि का राजमार्ग भी है। यह हर तरह से हमारे साझा भविष्य की कुंजी है।’’ 

मोदी ने कहा कि पिछले साल जून में सिंगापुर में आयोजित शंगरी-ला संवाद में उन्होंने हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में खुलेपन, एकीकरण और संतुलन बनाने के लिए मिलकर काम करने पर जोर दिया था।

भारत, अमेरिका और कई अन्य वैश्विक शक्तियां क्षेत्र में चीन के बढ़ते सैन्य प्रयासों की पृष्ठभूमि में मुक्त एवं खुले हिन्द-प्रशांत क्षेत्र की जरूरत की बात कर रही हैं।

मालदीव को समुद्री पड़ोसी और मित्र बताते हुए मोदी ने कहा, ‘‘दोस्तों में कोई छोटा, बड़ा, कमजोर और शक्तिशाली नहीं होता। शांतिपूर्ण और समृद्ध पड़ोस की बुनियाद विश्वास, सद्भाव और सहयोग पर टिकी होती है।’’ 

चीन हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश करता रहा है। 

चीन लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है। इसे लेकर वियतनाम, फिलीपीन, मलेशिया, ब्रूनेई और ताइवान के अपने अलग दावे हैं।

मोदी ने इस संबंध में कहा, ‘‘भारत ने हमेशा अपनी उपलब्धियों को दुनिया के साथ साझा किया है। भारत की विकास साझेदारी लोगों को सशक्त करने की है, उन्हें कमजोर करने की नहीं और न ही उनकी निर्भरता हम पर बढ़ाने या भविष्य की पीढ़ियों के कंधों पर कर्ज का असंभव बोझ डालने की है।’’
 

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