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प्रधानमंत्री ने सऊदी शाह व वरिष्ठ मंत्रियों से मुलाकात की, संबंधों को प्रगाढ़ बनाने पर हुयी चर्चा

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को यहां सऊदी अरब के शाह सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद से मुलाकात की और दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने के लिए मिलकर काम करने पर विचार विमर्श किया।

इस मुलाकात से पहले खाड़ी देश के शीर्ष मंत्रियों ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की और ऊर्जा, श्रम, कृषि तथा जल प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के तरीकों पर चर्चा की।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट कर बताया, ‘‘यह सदियों पुराने संबंधों को दर्शाता है। सऊदी अरब के शाह सलमान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया जो हमारे बढ़ते संबंधों के एक नए आयाम को रेखांकित करता है। महामहिम ने प्रधानमंत्री के सम्मान में दोपहर के भोज की मेजबानी की।"

प्रधानमंत्री मोदी दो दिवसीय यात्रा पर सोमवार देर रात रियाद पहुंचे। वह ‘‘फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव’’ (एफआईआई) की बैठक में शामिल होंगे। यह सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान की पहल है जिसे ‘‘दावोस इन द डेजर्ट’’ कहा जा रहा है।

मोदी की यहां की यह दूसरी यात्रा है। 2016 में अपनी पहली यात्रा के दौरान उन्हें सऊदी अरब के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। युवराज ने फरवरी 2019 में द्विपक्षीय संबंधों को और आगे बढ़ाने के लिए भारत की यात्रा की थी।

सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान, श्रम एवं सामाजिक विकास मंत्री अहमद बिन सुलेमान अलराज़ी और पर्यावरण, जल एवं कृषि मंत्री अब्दुल रहमान बिन अब्दुल मोहसिन अल-फजली आदि मंत्रियों ने सऊदी राजधानी में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्वीट किया कि सऊदी ऊर्जा मंत्री की प्रधानमंत्री के साथ सार्थक बैठक रही और दोनों नेताओं ने ‘‘दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग में सुधार के प्रयासों के बारे में चर्चा की।’’

यह बैठक काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देशों ने महाराष्‍ट्र के रायगढ़ में महत्वाकांक्षी पश्चिमी तट रिफाइनरी परियोजना पर आगे बढ़ने का फैसला किया है। इसमें सऊदी तेल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी अरामको, यूएई की अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी और भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां निवेश करेंगी।

भारत दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और वह अपनी तेल जरूरतों का 83 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इराक के बाद सऊदी अरब इसका दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। उसने वित्त वर्ष 2018-19 में भारत को 4.03 करोड़ टन कच्चा तेल बेचा जबकि भारत ने 20.73 करोड़ टन तेल का आयात किया था।

भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और अमेरिका तथा चीन के बाद तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है। भारत हर महीने सऊदी अरब से करीब 2,00,000 टन एलपीजी खरीदता है।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्वीट किया, ‘‘एक सतत भविष्य के लिए तालमेल को लेकर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब के पर्यावरण, जल एवं कृषि मंत्री अब्दुल रहमान बिन अब्दुल मोहसिन अल-फजली के साथ विस्तृत बैठक की।’’

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और जल प्रौद्योगिकी में सहयोग के नए क्षेत्रों की खोज करने के लिए पर्यावरण, जल एवं कृषि मंत्री के साथ ‘‘उपयोगी चर्चा’’ की।

प्रधानमंत्री मोदी ने श्रम और सामाजिक विकास मंत्री अहमद बिन सुलेमान अलराज़ी से भी मुलाकात की और श्रम से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की।

सऊदी अरब में भारतीय समुदाय के 26 लाख लोग रहते हैं और वे सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय हैं।

पिछले कुछ वर्षों में सऊदी अरब के साथ भारत के संबंध प्रगाढ़ हुए हैं। 2017-18 में सऊदी अरब के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार 27.48 अरब अमेरिकी डॉलर था और वह भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया।

सऊदी अरब ने पिछले महीने कहा था कि वह भारत में ऊर्जा, तेलशोधन, पेट्रोकेमिकल, बुनियादी ढांचे, कृषि, खनिज और खनन आदि क्षेत्रों में 100 अरब डालर का निवेश करने की उम्मीद कर रहा है।


यूरोपीय संसद के इन सदस्यों ने अपनी दो दिवसीय कश्मीर यात्रा के पहले, सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नयी दिल्ली में मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी ने इनका स्वागत करने के साथ उम्मीद जताई कि जम्मू कश्मीर सहित देश के अन्य हिस्सों में उनकी यात्रा सार्थक रहेगी।

पीएमओ ने एक बयान जारी करके कहा,‘‘इस दौरे से शिष्‍टमंडल को जम्‍मू, कश्‍मीर और लद्दाख क्षेत्र की सांस्‍कृतिक एवं धार्मिक विविधता को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही वे इस क्षेत्र के विकास एवं शासन से संबंधित प्राथमिकताओं की सही स्थिति से अवगत होंगे।’’

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने मेहमानों को दोपहर का भोज दिया और उन्हें जम्मू कश्मीर के हालात की जानकारी दी थी।

कुछ सप्ताह पहले अमेरिका के एक सीनेटर को कश्मीर जाने की इजाजत नहीं दी गई थी।

करीब दो महीने पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित विपक्षी सांसदों के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली से जाने पर श्रीनगर हवाई अड्डे से बाहर जाने की इजाजत नहीं दी गयी और उन्हें वापस दिल्ली भेज दिया गया था ।
 

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