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Super Exclusive खुलासा : जानिए कैसे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जीजा रॉबर्ट वाड्रा ने देशभक्त किसानों की जमीन हड़प ली

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

रॉबर्ट वाड्रा मनी लॉन्ड्रिंग मामले को लेकर जहां प्रवर्तन निदेशालय के चक्कर काट रहे हैं । उनसे लगातार ईडी के अधिकारी पूछताछ कर रहे हैं। वहीं जमीन घोटाले को भी लेकर रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही है । इसी क्रम में रिपब्लिक भारत ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जीजा रॉबर्ट वाड्रा को लेकर एक बहुत बड़ा खुलासा किया है । इस सुपर एक्सक्लूसिव खुलासे में कोलायत लैड़ स्कैम से जुड़ा हर राज आपके पास रखेगें।  जिसमें रॉबर्ट वाड्रा का नाम हैं। 

आज आपको इस खुलासे में हम बताएंगे कि कैसे कांग्रेस सरकार की मदद से राजस्थान में रॉबर्ट वाड्रा ने गरीबों की जमीन हड़पी । 

कैसे मिली ज़मीन ?

हम आज आपको बताएंगे कैसे रॉबर्ट वाड्रा ने गरीबों की जमीन हड़प ली और उन्हें बेघर कर दिया। इसे समझने के लिए जब रिपब्किल भारत की टीम राजस्थान के बीकानेर पहुंची । 

वहां से पता चला की पहले इस जमीन को एक मृत व्यक्ति नत्थाराम के नाम पर आवंटित की गई । उसके बाद एक फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी बनाया गया। जिसमें दिखाया गया कि नत्थाराम ने पावर ऑफ अटॉर्नी गुंगगर को दी । फिर गुंगगर ने जमीन राजेंद्र स्वामी को ट्रांसफर की। राजेंद्र ने वाड्रा के क़रीबी महेश नागर के ड्राइवर अशोक कुमार के नाम पर जमीन ट्रांसफ़र कर दी । इसके बाद अशोक ने 30 लाख रुपये के लिए यह जमीन रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी को ट्रांसफ़र कर दी । इसका मतलब साफ है कि रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी को मुनाफा और गरीबों को घाटा । 

इस मामले के तह तक जाने के लिए हमारे खुफिया रिपोर्टर बीकानेर से कोलायत गए और वहां से गजनेर गए फिर जयपुर पुहंचे । इस दौरान हमारी टीम ने गांव वालों से समेत पुलिस वालों से भी बात की और मामले को लेकर कई स्थानीय अधिकारियों से भी मिले । उनसे बात करने के बाद हमारे सामने जो सच आया उसे सून कर आप भी सन्न रह जाएंगे । 

आपको जानकर यह हैरानी होगी राजस्थान के देशभक्त लोगों ने गर्व से अपनी जमीन को देश की सबसे बड़ी मिलिट्री रैंज बनाने के लिए सरकार को दे दिया था । उसके मुआवजा में उन्हें जो जमीन चाहिए थी । उसे कुछ भ्रष्ट अफसरों ने अपनी जमीर का सौदा करके रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी के नाम कर दिया ।

रिपब्लिक भारत की खुफिया कैमरे के सामने गजनेर के के एसएचओ गुरमेल सिंह ने कई सनसनी खेज राज खोले। उन्होंने कहा 'माजन फायरिंग रेंज है यहां पर मिलिट्री का वहां से गांवों को उठाकर आगे जमीनें एलॉट की गई थीं। उन गांवों के वहां के पीछे से उठ के आये थे उनके प्रमाण पत्र वहां के जो पंचायत समिति प्रधान ने इस गांव के इतने लोग की इतनी जमीनें हैं इस तरह उन आदमियों के प्रमाण पत्र वहां से जारी हुए। उनके साथ कुछ फर्जी लोगों के नाम-पते लिखकर आगे जमीनें आवंटित करा दीं। जो जमीन इस इलाके की थी ( आवाज साफ नहीं) अब चूंकि वो आदमी वजूद में तो थे नहीं अब मान लो रामलाल नाम का आदमी वहां का नहीं था। यहां के जो लोकल लोग थे। गरीब तबका के लोग थे उनको उनका नाम दे दिया। फर्जी साइन करके। फिर जो फर्जी आदमी थे उन्होंने वो जमीन वाड्रा को बेच दी। ऐसा हुआ था। 

इसके बाद खुफिया कैमरे ने दी नजनेर पुलिस थाने पर दस्तक दी । गजनेर थाने के एसएसओ गरमल सिंह ने कहा " तो वो तो होना ही था फिर वो लास्ट में तो उनके पास चली गई ना। जिन लोगों को एलॉट की गई थी. जो पेमेंट हुई थी मोटे लेवल पर वो केवल रिकॉर्ड में हुई थी. वास्तव में तो उनको पेमेंट हुई नहीं वो। वही तो एक नंबर में हुआ था। वो एक नंबर में करने के लिए तो उन्होंने इतना बड़ा किया । '

पढ़िए स्टिंग ऑपरेशन के दौरान की बातचीत 

रिपब्लिक भारत की लीगल एडिटर रिदम आनंद भारद्वाज : मार्च 2017 में 2 चार्जशीट फाइल हुई है। कोलायत कोर्ट में। तो उसमें कहा गया है चार्जशीट 77A और 76A उसमें वाड्रा की कंपनी का नाम है। 

जगदीश सिंह राठौड़, एसएचओ, कोलायत : रॉबर्ट वाड्रा की जो जमीन है वो ऑडिट के अंदर है. उद्दट गांव है। यहां जो 32 एकड़ जमीन है वो है गजनैर एरिया में।

रिदम आनंद भारद्वाज : हां जी हां.. मैंने वही पढ़ा था। जब मैं कोर्ट फाइल पढ़ रही थी तो वो गजनैर गांव में है।

SHO जगदीश सिंह राठौड़ : हमारे पास जो दोनों मुकदमे थे वो दोनों सीबीआई के पास चले गए।

रिदम आनंद भारद्वाज : तो सर वो कह रहे हैं कि काला धन है। हवाला का पैसा है तो मुझे समझना था सब कुछ

SHO जगदीश सिंह राठौड़ : '' मैं बताऊं आपको जैसे मुझे ये फाइल मिली अगर ये फाइल मुझे मिल गई तो मैं बता सकता हूं इस बारे में। मैंने वो फाइल ही नहीं देखी। उसमें क्या है। क्या नहीं है। किस प्रकार से जमीन खरीदी है. किस प्रकार से नहीं खरीदी है. मुझे कुछ पता ही नहीं है इस बारे में''


बता दें राजस्थान सरकार ने जनवरी 2015 में 374.44 हेक्टेयर जमीन की दाखिल-खारिज रद्द कर दी थी क्योंकि भू विभाग ने दावा किया था कि आवंटन अवैध निजी व्यक्तियों को किये गये।

तहसीलदार ने शिकायत में कहा था कि बीकानेर के 34 गांवों में सरकारी जमीन, जो सेना के फायरिंग रेंज के विस्तार में उपयोग में आनी थी, को भू माफिया ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर जाली एवं मनगढंत दस्तावेजों के आधार पर हथिया ली थी। ईडी को संदेह है कि फर्जी दस्तावेजों के माध्य से सस्ते दाम पर लोगों ने जमीन खरीदार विशाल धन का शोधन किया था।

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