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जनता ने वंशवाद की राजनीति नकार दी लेकिन कांग्रेस अब भी सोनिया, राहुल को नेता बनाना चाहती है : शिवराज सिंह चौहान

Written By Neeraj Chouhan | Mumbai | Published:

वरिष्ठ भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को कहा कि पिछले आम चुनाव में वंशवाद की राजनीति नकार दी गई लेकिन कांग्रेस ने इससे कोई सीख नहीं ली और वह अब भी चाहती है कि पार्टी का नेतृत्व राहुल गांधी और सोनिया गांधी करें।

चौहान ने कहा कि भाजपा ने एक मिसाल कायम की क्योंकि उसके नेता स्वाभाविक रूप से पार्टी में उभरे जबकि कांग्रेस एक परिवार से आगे नहीं बढ़ पायी।

भाजपा के उपाध्यक्ष ने भुवनेश्वर में पत्रकारों से कहा, ‘‘कांग्रेस सीखना नहीं चाहती। यह हैरान करने वाला है कि सीडब्ल्यूसी अब भी चाहती है कि पार्टी का नेतृत्व राहुल गांधी और सोनिया गांधी करें।’’ 

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गौरतलब है कि कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने शनिवार को सोनिया गांधी को पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया। जब तक एआईसीसी स्थायी अध्यक्ष का चुनाव नहीं कर लेती तब तक सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष रहेंगी।

पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा कि राहुल गांधी द्वारा पार्टी नेताओं का आग्रह ‘विनम्रता से अस्वीकार किए जाने’ के बाद सीडब्ल्यूसी ने सोनिया को अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया। वह नए अध्यक्ष के चुनाव तक यह जिम्मेदारी निभाएंगी।

सीडब्ल्यूसी की दो बार हुई बैठक में तीन प्रस्ताव भी पारित किए गए। एक प्रस्ताव में बतौर अध्यक्ष राहुल गांधी के योगदान की सराहना की गई है, दूसरे में सोनिया को अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किए जाने तथा तीसरे प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर की स्थिति का उल्लेख है।

सीडब्ल्यूसी की बैठक में सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी, वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, एके एंटनी, गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे , राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कई अन्य नेता शामिल हुए।


मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि वंशवाद, परिवार और जाति की राजनीति से चल रही पार्टियों को आम चुनावों में उत्तर प्रदेश और बिहार समेत हर जगह हार मिलीं।

उन्होंने कहा कि लोगों ने पश्चिम बंगाल में भी तुष्टिकरण की राजनीति को नकार दिया। लोगों ने राष्ट्रवाद और विकास चुना।

चौहान ने दावा किया कि कांग्रेस को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से नेता चुनना चाहिए और अगर वह ऐसा करने में विफल रही तो पार्टी को कोई नहीं बचा सकता।

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