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ओवैसी के नागरिकता बिल संशोधन बिल फाड़ने पर बोले परेश रावल-यूएन में तिलमिलाए ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो की दिलाई याद

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

प्रवासी भारतीय कारोबारी मुबीन शाह को ‘‘अस्थायी तौर पर’’ रिहा किये जाने के दो दिन बाद जम्मू कश्मीर प्रशासन ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि उसने शाह के खिलाफ लोक सुरक्षा कानून (पीएसए) स्थायी रूप से हटा लिया है। मुबीन शाह को कश्मीर में प्राधिकारियों ने गत अगस्त में हिरासत में लिया था।

शाह को शनिवार को आगरा केंद्रीय कारागार से रिहा किया गया था। शाह को कश्मीर घाटी में हिरासत में लेने के बाद सात अगस्त को वहां ले जाया गया था। जम्मू कश्मीर से जुड़ी केंद्र की घोषणा के बाद शाह को कई नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अलगाववादियों के साथ हिरासत में लिया गया था।

जम्म कश्मीर के प्रधान गृह सचिव की ओर से जारी एक आदेश के अनुसार शाह की शनिवार को रिहायी ‘‘अस्थायी’’ थी और उन्हें अगले वर्ष सात मार्च को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया था।

यद्यपि रविवार को उसी अधिकारी ने एक अन्य आदेश जारी किया, उच्चतम न्यायालय के समक्ष कहा कि जम्मू कश्मीर लोक सुरक्षा कानून, 1978 की धारा 19 (1) में प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुये सरकार छह दिसंबर के आदेश के स्थान पर नजरबंदी का आदेश वापस ले रही है।

इस कानून के तहत सरकार किसी भी समय किसी व्यक्ति की हिरासत समाप्त कर सकती है या हिरासत आदेश में संशोधन कर सकती है।

न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ को केंद्र शासित प्रदेश की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि पीएसए को स्थायी तौर पर हटा लिया गया है। इसके बाद पीठ ने मुबीन शाह की पत्नी आसिफा मुबीन को सात अगस्त के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। मेहता ने कहा कि पीएसए स्थायी तौर पर वापस ले लिया गया है।

शीर्ष अदालत मुबीन शाह को नजरबंद करने के सात अगस्त के आदेश और जम्मू कश्मीर लोक सुरक्षा कानून, 1978 की धारा 8 (1)(ए) में नजरबंदी के आधारों को चुनौती देने वाली आसिफा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

आसिफा के वकील ने पीठ से कहा कि वह अब अपनी याचिका वापस लेना चाहेंगे क्योंकि यह निरर्थक हो गयी है। पीठ ने उसे इसकी अनुमति दे दी।

शाह के वकील शरीक जे रियाज ने सुनवायी के बाद पीटीआई से कहा, ‘‘जब सॉलिसिटर जनरल ने मेरे मुवक्किल के खिलाफ पीएसए पूरी तरह से हटाने का आदेश पेश किया, याचिका का निस्तारण हो गया।’’

विवादास्पद पीएसए के जिन पर आरोप लगाये थे, शाह संभवत: उनमें से पहले व्यक्ति हैं जिन्हें केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने अदालत से किसी निर्देश के बिना रिहा किया।

दक्षिण एशिया मानवाधिकार पर अमेरिकी कांग्रेस में चर्चा के दौरान शाह का उल्लेख हुआ था जो कि कश्मीर में भारत के कदम पर केंद्रित थी। यह पिछले महीने हुई थी जब भारतीय मूल की अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद प्रमिला जयपाल ने उनकी हिरासत का मुद्दा उठाया था।

दक्षिण एवं मध्य एशिया मामलों के लिए अमेरिका की सहायक विदेश मंत्री एलिस जी वेल्स ने जवाब में कहा था कि अमेरिका ने शाह के मुद्दे को भारत सरकार के साथ उठाया है।

शाह मलेशिया के बाहर बसे हैं जहां पर वह अपना हस्तकला का व्यापार चलाते हैं और वह वर्ष में एक बार कश्मीर की यात्रा करते थे। वह पूर्व में कश्मीर चैंबर आफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष रह चुके हैं।

वह इस वर्ष मई में मलेशिया से कुछ समय के लिए कश्मीर आये थे लेकिन उन्हें अपना प्रवास अपने परिवार में किसी की मृत्यु के चलते बढ़ाना पड़ा था। बाद में उन्हें किसी संक्रमण के चलते अपना प्रवास बढ़ाना पड़ा था, जिसका इलाज श्रीनगर के एक अस्पताल में चल रहा था।
 

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