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तेलंगाना में एक तरह से विपक्ष मुक्त विधानसभा की स्थिति

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

तेलंगाना में कुछ लोगों का मानना है कि कांग्रेस के दो तिहाई विधायकों के सत्तारूढ़ टीआरएस में शामिल होने से एक तरह से विपक्ष मुक्त विधानसभा की स्थिति बन गई है। 

कुछ अन्य का तर्क है कि विपक्ष संख्याबल में कम हो सकता है लेकिन उसकी ताकत पहले की तरह मजबूत है। टीआरएस ने गत दिसंबर में हुए चुनाव में 119 सदस्यीय विधानसभा में 88 सीटें जीती थी जबकि कांग्रेस ने 19 और एआईएमआईएम ने सात, तेदेपा ने दो और भाजपा ने एक सीट जीती थी।

एक निर्दलीय विधायक, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के टिकट पर विजयी एक उम्मीदवार और तेदेपा सांसद टीआरएस में शामिल हो गए थे।

इसके बाद मार्च की शुरुआत में कांग्रेस छोड़ने का सिलसिला शुरू हुआ और गत सप्ताह उसके 12वें विधायक ने पार्टी छोड़ दी। अध्यक्ष ने 12 विधायकों के टीआरएस में शामिल होने के अनुरोध को मंजूर कर लिया।

इसके साथ ही सदन में टीआरएस सदस्य की संख्या 103 हो गई। सदन में सदस्यों की संख्या भी 118 रह गई क्योंकि प्रदेश कांग्रेस प्रमुख एन उत्तम कुमार रेड्डी ने लोकसभा चुनाव में जीत के बाद अपनी सीट से इस्तीफा दे दिया।

कांग्रेस के विधायकों की संख्या छह तक सिमटने के बाद एआईएमआईएम ने कहा कि वह विपक्ष के नेता पद के लिए दावा पेश करेगी क्योंकि उसके पास सात विधायक हैं।

लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या एआईएमआईएम सही मायने में विपक्षी दल है? टीआरएस और एमआईएमआईएम अपने आप को मित्र बताती हैं और उन्होंने विधानसभा तथा लोकसभा दोनों में आपसी सहमति से चुनाव लड़ा था।

टीआरएस (तेलंगाना राष्ट्र समिति) के प्रवक्ता आबिद रसूल खान ने कहा, ‘‘हम शुरुआत से कह रहे हैं कि हम किसी विपक्ष मुक्त विधानसभा के लिए काम नहीं कर रहे हैं।’’ 

उन्होंने दावा किया कि इन विधायकों ने ‘‘नेतृत्व, दूरदृष्टि, अच्छे प्रदर्शन के अभाव’’ में कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘हम लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ कुछ भी नहीं कर रहे हैं। अगर वे (कांग्रेस) खुद अलग हो रहे है तो हम पार्टी को खड़ा नहीं कर सकते।’’ 

कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली तेलंगाना जन समिति (टीजेएस) के प्रमुख प्रो. एम कोडंडरम ने इससे असहमति जताई।

उन्होंने दावा किया, ‘‘इस दल-बदल का परिणाम निरंकुशता और एक पार्टी का प्रभुत्व होगा जो लोगों के हितों के खिलाफ है। लोग नाखुश हैं। दल-बदल के खिलाफ काफी नाराजगी है।’’ 

अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के तेलंगाना के प्रभारी आर सी खुंटिया ने कहा कि जब सत्तारूढ़ पार्टी के पास आसान बहुमत है तो उसे दूसरी पार्टियों से विधायक ‘‘खरीदने’’ की जरुरत नहीं है।

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