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#MeToo: उदित राज ने पूछा- क्या होगा यदि झूठी शिकायत से किसी की छवि खराब हो जाती है?

Written By Digital Desk | Mumbai | Published:

देशभर में चल रहे ‘मी टू’ अभियान को कुछ ही दिन पहले एक ‘‘खराब प्रथा’’ बताने वाले भाजपा सांसद उदित राज ने गुरुवार को एक बार फिर इस अभियान पर सवाल खड़े किये. उन्होंने पूछा कि क्या होगा यदि किसी पुरुष पर महिला के कथित यौन उत्पीड़न की शिकायत झूठी साबित हो और इसके कारण (आरोपों की वजह से) उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा धूमिल हो जाए.

उन्होंने कहा कि यौन उत्पीड़न की महज एक शिकायत के आधार पर आरोपी पर कार्रवाई करने या उसके इस्तीफे की मांग करने का मतलब है कि पुलिस या न्यायिक व्यवस्था की कोई जरुरत ही नहीं है.

उत्तरी-पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद ने ट्वीट किया, ‘‘यौन उत्पीड़न के पीड़ित व्यक्ति की महज मौखिक या लिखित शिकायत पर ही फैसले पर पहुंच जाना और उसपर कार्रवाई करना या उसके इस्तीफे की मांग करने का मतलब है कि पुलिस या न्यायिक व्यवस्था की कोई जरुरत ही नहीं है. क्या होगा यदि वह मामला झूठा साबित हो जाता है और क्या किसी व्यक्ति की खोई हुई प्रतिष्ठा वापस आ सकती है?’’

इस हफ्ते की शुरुआत में भी राज ने भारत में चल रहे ‘मी टू’ अभियान को एक ‘‘खराब चलन’’ बताया था और इस पर सवाल खड़ा करते हुये कहा था कि 10 साल बाद किसी व्यक्ति के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने का क्या औचित्य है.

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से देशभर में महिलाएं अपने साथ कभी हुये यौन उत्पीड़न के अनुभव को साझा कर रही हैं. खासकर इसमें मनोरंजन और मीडिया जगत की पीड़िताएं ज्यादा मुखरता से अपनी बात रख रही हैं. हाल ही में तनुश्री दत्ता द्वारा नाना पाटेकर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाये जाने के बाद इस अभियान की शुरुआत हुई थी, जिसमें आगे चलकर कई अन्य महिलाएं भी जुड़ती चली गईं.

(इनपुट- भाषा)

 

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