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निर्भया मामला : अदालत ने दोषी पवन का प्रतिनिधित्व करने के लिए रवि काजी को वकील नियुक्त किया

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले के चार दोषियों में से एक पवन गुप्ता का प्रतिनिधित्व करने के लिए रवि काजी को वकील नियुक्त किया।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने काजी को वकील नियुक्त किया। इसके पहले गुप्ता ने डीएलएसए द्वारा की गयी कानूनी मदद की पेशकश को ठुकरा दिया था।

अदालत ने बुधवार को गुप्ता के लिए वकील की पेशकश की थी और उसकी ओर से प्रक्रिया में देरी पर नाराजगी जतायी थी।

गुप्ता ने कहा कि उसने अपने पहले वकील को हटा दिया है और उसे नये वकील के लिए समय चाहिए।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) ने गुप्ता के पिता को अपने पैनल में शामिल वकीलों की सूची दी थी।

इस मामले में चार दोषियों में से सिर्फ गुप्ता ने ही अभी तक सुधारात्मक याचिका दायर नहीं की है। इसके अलावा उसके पास दया याचिका का विकल्प भी है।

बता दें  तिहाड़ जेल के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को दिल्ली की एक अदालत को बताया कि निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले के चार दोषियों में से एक पवन गुप्ता ने कानूनी मदद के रूप में वकील लेने से इनकार कर दिया है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने बुधवार को पवन को वकील की पेशकश की थी और उसकी ओर से विलंब करने पर नाराजगी जताई थी।

पवन ने कहा था कि उसने अपने पहले वकील को हटा दिया है और नया वकील करने के लिए उसे समय चाहिए।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) ने पवन के पिता को वकील चुनने के लिए अपने पैनल में शामिल अधिवक्ताओं की एक सूची उपलब्ध कराई थी।

पवन ने अब तक सुधारात्मक याचिका दायर नहीं की है। उसके पास दया याचिका दायर करने का भी विकल्प है।

उच्चतम न्यायालय ने 2012 के निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले के दोषियों में से एक विनय कुमार शर्मा की दया याचिका राष्ट्रपति द्वारा खारिज किये जाने के खिलाफ दायर याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई पूरी की। न्यायालय इस याचिका पर शुक्रवार को अपनी व्यवस्था देगा।

विनय शर्मा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उसकी दया याचिका विद्वेषपूर्ण तरीके से खारिज की गयी है। इस दोषी ने अपनी मौत की सजा को उम्र कैद में तब्दील करने का न्यायालय से अनुरोध किया है।

न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने विनय शर्मा की याचिका पर करीब दो घंटे तक सुनवाई के बाद कहा कि इस पर शुक्रवार को अपराह्न दो बजे आदेश सुनाया जायेगा।

विनय ने अपनी याचिका में दलील दी है कि जेल में ‘कथित यातनाओं और दुर्व्यवहार’ की वजह से वह मानसिक रूप से अस्वस्थ हो गया।

शर्मा के वकील ए पी सिंह ने कहा कि राष्ट्रपति ने विद्वेषपूर्ण तरीके से उनके मुवक्किल की दया याचिका खारिज की है क्योंकि इस मामले से सबंधित सारा रिकार्ड उनके समक्ष नहीं रखा गया था।

उन्होंने कहा कि जेल में विनय को यातनाएं दी गयीं और उसे एकांत कोठरी में रखा गया और जेल में हुये अवसाद की वजह से वह मानसिक रूप से अस्वस्थ हो गया है।

केन्द्र और दिल्ली सरकार की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने सिंह की दलीलों का विरोध किया और कहा कि राष्ट्रपति ने सारे संबंधित रिकार्ड का अवलोकन किया था। उन्होंने कहा कि विनय की दया याचिका खारिज किये जाने में कानून के तहत सारी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।

मेहता ने विनय शर्मा की 12 फरवरी की मेडिकल रिपोर्ट पीठ के समक्ष पेश की और कहा कि उसे पूरी तरह स्वस्थ पाया गया है।

सिंह का आरोप था कि दिल्ली के उपराज्यपाल और गृह मंत्री ने उसकी दया याचिका खारिज करने की सिफारिश पर दस्तखत नहीं किये थे।

पीठ ने दया याचिका खारिज करने की सिफारिश का अवलोकन करने का सिंह का अनुरोध ठुकरा दिया। पीठ ने रिकार्ड का अवलोकन किया और कहा कि उन्होंने दया याचिका खारिज करने की सिफारिश पर दस्तखत किये हैं।

राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज किये जाने के बाद विनय ने मंगलवार को शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि जेल में प्राधिकारियों ने उसके मौलिक अधिकारों का हनन किया और उसे गैरकानूनी तरीके से अलग रखा गया। याचिका में कहा गया है कि जेल में मानसिक रूप से अस्वस्थता मृत्यु दंड को उम्र कैद में तब्दील करने का एक आधार है।

निचली अदालत ने 31 जनवरी को अगले आदेश तक के लिये चारों दोषियों-मुकेश कुमार सिंह, पवन गुप्ता, विनय कुमार शर्मा और अक्षय कुमार को फांसी देने पर रोक लगा दी थी। ये चारों दोषी इस समय तिहाड़ जेल में बंद हैं।

निर्भया से 16-17 दिसंबर, 2012 को दक्षिणी दिल्ली में चलती बस में छह व्यक्तियों ने सामूहिक बलात्कार के बाद उसे सड़क पर फेंक दिया था। निर्भया की बाद में 29 दिसंबर, 2012 को सिंगापुर के एक अस्पताल में मौत हो गयी थी।

इन छह आरोपियों में से एक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी जबकि छठा आरोपी किशोर था जिसे तीन साल सुधार गृह में रखने के बाद 2015 में रिहा कर दिया गया।
 

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