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नयी शिक्षा नीति भारत को ज्ञान की महाशक्ति के रूप में स्थापित करेगी: राष्ट्रपति कोविंद

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को कहा कि केंद्र की नयी शिक्षा नीति (एनईपी) देश को ‘ज्ञान की महाशक्ति’ के रूप में स्थापित करने में और छात्रों की प्रतिभा को वैश्विक मान्यता दिलाने में मददगार साबित होगी।

उल्लेखनीय है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय नयी शिक्षा नीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है और अंतिम मसौदा जल्द ही कैबिनेट के समक्ष रखे जाने की संभावना है।

कोविंद ने यहां जामिया मिल्लिया इस्‍लामिया के वार्षिक दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘भारत को एक ‘ज्ञान की महाशक्ति’ के रूप में स्‍थापित करना मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा प्रस्‍तावित ‘राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति’ के महत्‍वपूर्ण उद्देश्‍यों में से एक है। पूरा विश्‍व भारत के छात्रों की असाधारण प्रतिभा से अवगत है। इस प्रतिभा के समुचित इस्‍तेमाल के लिए देश की सभी शैक्षिक संस्‍थाओं को योगदान करना होगा।’’

उनके विचारों से सहमति जताते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा, ‘‘यह नीति नये भारत की आधारशिला रखेगी और लड़कियों, अल्पसंख्यकों तथा समाज के वंचित तबके के लोगों को तकनीकी, वैज्ञानिक तथा रोजगारोन्मुखी शिक्षा मुहैया कराएगी।’’

नयी शिक्षा नीति 2014 को आमचुनाव से पहले भाजपा के घोषणपत्र में शामिल किया गया था। मौजूदा नयी शिक्षा नीति 1986 में तैयार की गई थी और इसे 1992 में संशोधित किया गया।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि विकास के साथ समाज के प्रत्‍येक हिस्‍से को जोड़ने के क्रम में, कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्‍व (सीएसआर) की तर्ज पर ‘विश्‍वविद्यालय के सामाजिक दा‍यित्‍व’ पर जोर देने की जरूरत है।

उन्‍होंने कहा कि जामिया ने ‘उन्‍नत भारत अभियान’ के तहत पांच गांवों को गोद लिया है। उन्‍होंने विश्वविद्यालय से कहा कि क्‍या यह कुछ और गांवों को गोद ले सकता है।

उन्‍होंने कहा कि इस अभियान के लिए काम करते समय, छात्रों को उन गांवों तक जाना चाहिए और उनकी समस्‍याओं को समझने की कोशिश करनी चाहिए।

कोविंद ने कहा कि छात्रों को ग्रामीण लोगों को गांव की स्‍वच्‍छता, साक्षरता, सभी बच्‍चों के टीकाकरण और पोषण जैसी योजनाओं से अवगत कराना चाहिए।

दीक्षांत समारोह में 10,000 से अधिक छात्रों को डिग्रियां और डिप्लोमा प्रदान किये गये।

राष्ट्रपति ने इस बात का जिक्र किया कि लगातार दूसरे साल स्वर्ण पदक पाने वाली छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा की दिशा में विश्वविद्यालय की कोशिशों की सराहना की।


 

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