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दिल्ली में यातायात प्रबंधन में तकनीकी इस्तेमाल की अनदेखी से हालात हुए खराब : रिपोर्ट

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

दिल्ली में यातायात व्यवस्था की बदहाली और इस कारण होने वाले हादसों के पीछे सड़कों की डिजाइन में खामी तथा यातायात प्रबंधन में तकनीक का अपर्याप्त इस्तेमाल मुख्य वजह है।

‘‘ दिल्ली में यातायात की बिगड़ती स्थिति ’’ पर संसदीय समिति की रिपोर्ट में इस बात को उजागर किया गया है कि दिल्ली में न तो अभी तक तकनीक आधारित यातायात प्रबंधन की क्षमता हासिल की जा सकी है और न ही पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत यातायात प्रबंधन को लागू किया गया है।

इस सप्ताह समाप्त हुये संसद के शीतकालीन सत्र में पेश की गयी रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में यातायात प्रबंधन क्षमता की दयनीय स्थिति ने यातायात की समस्या को गहरा दिया है।

समिति ने केन्द्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) सहित अन्य संगठनों से प्राप्त रिपोर्टों के आधार पर दिल्ली की बदहाल यातायात व्यवस्था के कारणों और प्रभावों का जिक्र करते हुये कहा कि अपर्याप्त तकनीक के इस्तेमाल के कारण सड़कों पर यातायात दबाव के मुताबिक ट्रैफिक सिग्नल का समय भी निर्धारित नहीं किया गया है जिसके कारण सड़कों पर यातायात वितरण भी असमान है।

समिति ने इसकी वजह कंप्यूटर आधारित प्रणाली के माध्यम से प्रभावी तकनीक के न होने को वजह बताते हुये कहा है कि इससे भी यातायात की समस्याओं में इजाफा हुआ है। सीआरआरआई के अनुसार दिल्ली में कुल 3300 किमी सड़कों का जाल है , जो कि दिल्ली के 21 प्रतिशत क्षेत्रफल के बराबर हैं। साथ ही प्रति 100 वर्ग किमी क्षेत्रफल में 1794 किमी सड़कों की मौजूदगी के कारण दिल्ली देश के सबसे सघन सड़क नेटवर्क वाला शहर है। हालांकि दिल्ली में वाहनों की बढ़ती संख्या के मुताबिक सड़कों के विस्तार की धीमी गति के कारण सड़कों पर वाहनों का अत्यधिक बोझ है।

यातायात की बदहाली के प्रभाव के बारे में समिति ने सीआरआरआई के एक अध्ययन के हवाले से कहा कि राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर ‘ ट्रैफिक जाम ’ अब दिल्ली वालों की जिंदगी का हिस्सा बन गया है और इसने जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित किया है।

गत 22 अक्टूबर को समिति की बैठक में सीआरआरआई की ओर से बताया गया कि व्यस्त घंटों में दिल्ली की मुख्य सड़कों पर वाहनों की औसत गति पांच से 10 किमी प्रति घंटा रह गयी है। इससे न सिर्फ समय की बर्बादी होने से मानव श्रम की क्षति होती है बल्कि ईंधन की बर्बादी से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है।

समिति ने दिल्ली की यातायात व्यवस्था पर आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय की एक उच्च स्तरीय समिति के हवाले से सड़कों के डिजाइन को तकनीकी खामियों वाला बताया है। इसे सड़क सुरक्षा के लिहाज से गंभीर बताते हुये समिति ने सड़कों की डिजाइन में खामियों के कारण सड़क हादसों में देशव्यापी स्तर पर इजाफे के मद्देनजर सरकार से इसे तत्काल दुरुस्त करने की जरूरत पर बल दिया है।

समिति ने दिल्ली की सड़कों पर दो पहिया वाहन , चार पहिया वाहन और साइकिल एवं रिक्शा सहित अन्य गैर मोटर वाहनों की अधिकता को देखते हुये विभिन्न श्रेणियों के वाहनों के लिये पृथक लेन बनाने की भी सिफारिश की है।

साथ ही समिति ने लुटियन दिल्ली में महत्वपूर्ण व्यक्तियों के आवागमन के लिये पृथक लेन की जरूरत पर बल देते हुये कहा , ‘‘ लुटियन क्षेत्र में अधिकांश महत्वपूर्ण व्यक्ति निवास करते हैं , लेकिन इस क्षेत्र में सुगम यातायात के लिये अलग लेन का कोई प्रावधान नहीं है जिसके कारण ट्रैफिक जाम हो जाता है जिससे इनकी सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। ’’

समिति ने इसके मद्देनजर सिफारिश की है कि गृह मंत्रालय को दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करना चाहिये जिससे महत्पूर्ण लोगों की अबाध आवाजाही सुनिश्चित हो सके और जनसामान्य को भी असुविधा न हो।
 

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