General News

राकांपा सांसद ने सरकार से प्याज के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग की

Written By Press Trust of India (भाषा) | Mumbai | Published:

 राकांपा की सुप्रिया सुले ने किसानों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि केंद्र सरकार को प्याज के लिए वैसी ही स्पष्ट नीति बनानी चाहिए जैसे गेहूं और धान के संबंध में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नीति बनाई गई है। विभिन्न कारणों से फसलों को हुई क्षति और इसका किसानों पर प्रभाव पर नियम193 के तहत चर्चा में हिस्सा लेते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि प्याज की कीमतें आज एक बड़ा मुद्दा है और इस पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है ।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से धान और गेहूं के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान की जाती है , ऐसी ही कोई स्पष्ट नीति प्याज के संदर्भ में भी बनाये जाने की जरूरत है ।

राकांपा सदस्य ने कहा कि सरकार बताये कि जीई फसल और फसलों की प्रजाति एवं बेहतरी के लिए अनुसंधान एवं विकास कार्य में उसकी नीति क्या है ।

उन्होंने मांग की कि कृषि से जुड़े संस्थानों में वैज्ञानिकों के रिक्त पदों को भरा जाए ।

उन्होंने कहा कि किसान परेशान है , छोटे छोटे खर्च नहीं जुटा पा रहा है , ऐसे में सरकार बताये कि क्या वह किसानों की कर्जमाफी के बारे में विचार कर रही है? सुले ने कहा कि सरकार यह भी बताये कि क्या वह शून्य ब्याज पर कर्ज देने पर विचार कर रही है?

प्याज पर दिये अपने बयान के कारण विपक्ष के निशाने पर आयीं निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को इस बात का कड़ा प्रतिकार किया कि मोदी सरकार ‘‘संभ्रातवादी’’ है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता तो सरकार उज्ज्वला योजना, जनधन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान योजना जैसी आम लोगों से जुड़ी योजनाएं कभी नहीं लाती।

राज्य सभा में सीतारमण ने कराधान विधि (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान यह बात कही। उन्होंने यह बात कल लोकसभा में की गयी एक टिप्पणी के संदर्भ में कही। उन्होंने कल लोकसभा में अनुदान की अनुपूरक मांगों पर चर्चा के जवाब में कहा था, ‘‘उनका परिवार प्याज को बहुत अधिक महत्व नहीं देता है।’’ उनकी इस टिप्पणी को लेकर विपक्षी नेताओं ने निशाना साधा था।

वित्त मंत्री ने कहा कि उन्होंने लोकसभा में बताया था कि किस प्रकार प्याज की आपूर्ति को बढ़ाने के लिए सरकार विभिन्न कदम उठा रही है। राजस्थान से खरीदकर ट्रकों के जरिये झारखंड और बिहार में प्याज भेजा जा रहा है। किंतु सरकार के इन कदमों को सुर्खियों में जगह नहीं दी गयी है, बस उनके एक वाक्य को लेकर सुर्खियां बना दिया गया।

निर्मला ने कहा कि यह आलोचना उनकी नहीं बल्कि सरकार और पूरी अर्थव्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि यदि मोदी सरकार संभ्रातवादी होती तो सरकार उज्ज्वला योजना, जनधन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान योजना जैसी आम लोगों से जुड़ी योजनाएं कभी नहीं लाती। उन्होंने सवाल किया कि क्या ये योजनाएं ‘‘संभ्रातवादी’’ हैं।

उन्होंने 2012 में मुद्रास्फीति और खाद्य वस्तुओं के मूल्य बढ़ने की चर्चा करते हुए कहा कि तत्कालीन वित्त मंत्री ने कहा था कि जब लोग 15 रूपये की मिनरल वाटर की बोतल और 20 रूपये की आइसक्रीम खरीद सकते हैं तो वे मूल्यवृद्धि को लेकर हायतौबा क्यों मचा रहे हैं?

DO NOT MISS