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गांव से निकलकर विश्व चैम्पियन बनने तक की कहानी, भारत की दिग्गज मुक्केबाज मेरीकॉम की जुबानी - देखें वीडियो

Written By Amit Bajpayee | Mumbai | Published:

छठा गोल्ड जीत कर इतिहास रचने वाली भारत की दिग्गज मुक्केबाज एसपी मेरीकॉम ने रिपब्लिक टीवी के ऐडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी से बात करते हुए 'नेशन वांट टू ' कार्यक्रम में अपनी सफलता का राज बताया. 

मेरीकॉम ने बताया कि वह अपने आप को प्रेरित रखने के लिए रिंग में अभ्यास के दौरान म्यूजिक सुनती है. मुझे भरोसा कि मैं खुद नहीं करूंगी तो भगवान भी मेरी सहायता नहीं करेगा. मुझे बाइबिल में डेविड और गोलियथ की स्टोरी बहुत प्रेरणा मिलती है. इस दौरान मेरी ने मुक्केबाज मोहम्मद अली को अपना हीरो बताया. 

महिला विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप के फाइनल मैच का जिक्र करते हुए मेरकॉम ने कहा कि, मैच से 2 महिने पहले उसे एक सेमिफाइनल में रहा चुकी थी. उस फाइट में दो मैंच के बाद डाइरैक्ट सेमीफाइनल खेली थी. इस वजह से मुझे यूक्रेन की हन्ना अकोटा की सारी कमजोरियां की जानकारी थी. इसलिए फाइनल मैच से पहले मुझो कोई डर नहीं था. 

बता दें मेरीकॉम ने फाइनल में हन्ना ओखोटा को 5-0 से मात देकर विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में सबसे ज्यादा छह स्वर्ण पदको पर कब्जा जमा कर की अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की. 

मेरीकॉम का जन्म मणिपुर के चुराचांदपुर में एक किसान परिवार में हुआ था. लेकिन मरीकॉाम का बचपन गरीबी के चलते काफी कठिनाईयों में बीता. परिवार की गरीबी मेरीकॉम के लिए खेलों में अपनी रुचि के आधार पर इस क्षेत्र में प्रोफेशनल ट्रेनिंग की तरह था. लेकिन कहते हैं न चाह वहीं राह.

मेरी ने बाताया कि उनके पिता एक किसान थे और उन्हें उनका बॉक्सिंग का खेल बिल्कुल भी पसंद नहीं था लिहाजा उन्होंने की कई बार मैरी को बॉक्सिंग बंद करने करने के लिए कहा , लेकिन हर मां ने मेरी का स्पोर्ट किया. और बॉक्सर बनने के मैरी जुनून ने उन्हें वर्ल्ड चैम्पियन बना दिया. 

मणिपुर की इस खिलाड़ी ने आठ साल में छह ख़िताब अपने नाम किए हैं वह भी तब जब उनके पास खेल के अलावा अन्य जिम्मेदारियां भी हैं। तीन बच्चों की मां मैरी ने कहा कि वह अपना सातवां ख़िताब जीतने के सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहीं है .

उन्होंने अपने परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि मेरे इस सफलता के पीछे मेरे पति का भी बहुत बड़ा योगदान है. जुड़वा बच्चों को जन्म देने के बाद जब मैंने रिंग में उतरने का फैसला किया जो बहुत मुश्किल था.डेलवरी सर्जरी से रिकर्वर कर रिंग में लौटने में मुझे दो साल लग गए. इस दौरान कमजोरी और पूरी तह फिट न होना भी समस्या था. . लेकिन मेडल की भूख ने मुझे फिर से चैंपियन बना दिया. 

इसके बाद मैरी कॉम ने 2010 में विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण , 2010 एशियाई खेलों में कांस्य , 2012 ओलपिं में कांस्य , 2014 एशियाई खेलों में स्वर्ण और 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता.


 

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